सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: पत्नी से कुछ दिनों तक बात न करना क्रूरता नहीं, पति को मिली राहत
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि पत्नी से कुछ दिनों तक बात न करना अपने आप में IPC 498A के तहत क्रूरता नहीं माना जा सकता। अदालत ने सबूतों की कमी के आधार पर आत्महत्या मामले में पति को बरी कर दिया।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि वैवाहिक जीवन में सामान्य तनाव या बातचीत का बंद हो जाना अपने आप में IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता नहीं माना जा सकता। अदालत ने आत्महत्या से जुड़े एक मामले में पति को बरी करते हुए यह टिप्पणी की कि आरोपों को साबित करने के लिए ठोस और विश्वसनीय सबूत आवश्यक हैं।
क्या था मामला?
यह मामला एक महिला की आत्महत्या से जुड़ा हुआ था, जिसमें उसके पति पर मानसिक प्रताड़ना और क्रूरता का आरोप लगाया गया था। आरोप था कि पति ने कई दिनों तक पत्नी से बातचीत बंद रखी, जिससे मानसिक तनाव बढ़ा और महिला ने आत्महत्या कर ली।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद कहा कि केवल 13 दिनों तक पत्नी से बात न करना, अपने आप में मानसिक क्रूरता साबित नहीं करता।