सैलून और ब्यूटी पार्लरों में मेडिकल ब्यूटी प्रक्रियाओं पर सख्ती, CDSCO ने जारी किए नए निर्देश
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सुई का उपयोग करने वाली किसी भी ब्यूटी प्रक्रिया को कॉस्मेटिक नहीं माना जाएगा। इसके तहत सैलून और ब्यूटी पार्लरों में बिना मेडिकल निगरानी के किए जाने वाले इंजेक्टेबल और लेज़र उपचारों पर सख्ती बढ़ा दी गई है। इस कदम का उद्देश्य उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और असुरक्षित सौंदर्य प्रक्रियाओं पर रोक लगाना है।
भारत में तेजी से बढ़ रहे ब्यूटी और एस्थेटिक ट्रीटमेंट्स के बाजार के बीच केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और स्वास्थ्य मंत्रालय ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मई 2026 में जारी एक सार्वजनिक नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि जिन उत्पादों या प्रक्रियाओं में सुई (Needle) का उपयोग किया जाता है, उन्हें कानूनी रूप से "कॉस्मेटिक" नहीं माना जा सकता। इसके साथ ही ब्यूटी पार्लर, सैलून और एस्थेटिक क्लीनिकों में बिना योग्य मेडिकल विशेषज्ञों की निगरानी के किए जाने वाले लेज़र और इंजेक्टेबल उपचारों पर निगरानी और सख्ती बढ़ा दी गई है।
क्या कहा है CDSCO ने?
CDSCO ने 18 मई 2026 को जारी नोटिस में कहा कि कॉस्मेटिक उत्पाद केवल बाहरी उपयोग (External Use) के लिए होते हैं। इन्हें शरीर पर लगाया, छिड़का या स्प्रे किया जा सकता है, लेकिन किसी भी कॉस्मेटिक उत्पाद को इंजेक्शन के रूप में उपयोग करने की अनुमति नहीं है। संगठन ने स्पष्ट किया कि इंजेक्टेबल तैयारियां कॉस्मेटिक की कानूनी परिभाषा में नहीं आतीं और इन्हें उपभोक्ताओं, पेशेवरों या एस्थेटिक क्लीनिकों द्वारा उपयोग नहीं किया जा सकता।