रूसी वैज्ञानिकों का दावा: कोलोरेक्टल कैंसर के लिए एंटेरोमिक्स वैक्सीन 100% सुरक्षित और असरदार”

रूस की ‘एंटेरोमिक्स’ वैक्सीन, mRNA तकनीक और AI की मदद से कैंसर के इलाज के लिए पर्सनलाइज्ड तरीके से तैयार की गई है, जो कोलोरेक्टल कैंसर पर केंद्रित है और प्री-क्लीनिकल ट्रायल्स में प्रभावी साबित हुई है। यह वैक्सीन कैंसर के दोबारा लौटने पर इम्यूनोथेरेपी के साथ बेहतर परिणाम दे सकती है।

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Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor
September 10, 2025 • 7:15 PM  61
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रूसी वैज्ञानिकों का दावा: कोलोरेक्टल कैंसर के लिए एंटेरोमिक्स वैक्सीन 100% सुरक्षित और असरदार”
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रूसी वैज्ञानिकों का दावा: कोलोरेक्टल कैंसर के लिए एंटेरोमिक्स वैक्सीन 100% सुरक्षित और असरदार”

रूस ने कैंसर के इलाज में एक नया कदम उठाया है। रूसी वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने एक ऐसी कैंसर वैक्सीन विकसित की है, जो न केवल कैंसर से लड़ने में मदद करेगी, बल्कि इसे मरीज के ट्यूमर के हिसाब से तैयार किया जाएगा। इस वैक्सीन का नाम है एंटेरोमिक्स, और यह mRNA तकनीक पर आधारित है, जिसका उपयोग कोविड-19 वैक्सीन में भी किया गया था। रूस की न्यूज एजेंसी TASS के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, यह वैक्सीन अब मरीजों पर इस्तेमाल के लिए तैयार है और जल्द ही इसका आधिकारिक अप्रूवल मिलने की उम्मीद है।

वैक्सीन की खासियत: इलाज, न कि रोकथाम

एचपीवी वैक्सीन, जो सर्वाइकल कैंसर से बचाव करती है, और हेपेटाइटिस बी वैक्सीन, जो लिवर कैंसर के जोखिम को कम करती है, के विपरीत, एंटेरोमिक्स कैंसर की रोकथाम के लिए नहीं, बल्कि इसके इलाज के लिए बनाई गई है। यह वैक्सीन उन मरीजों के लिए है, जिन्हें पहले से कैंसर हो चुका है। यह पर्सनलाइज्ड वैक्सीन है, यानी इसे हर मरीज के ट्यूमर के आधार पर अलग-अलग तैयार किया जाता है।

कैसे काम करती है एंटेरोमिक्स?

एंटेरोमिक्स वैक्सीन mRNA तकनीक का उपयोग करती है। यह तकनीक शरीर की कोशिकाओं को निर्देश देती है कि वे एक खास प्रोटीन बनाएं, जिसे इम्यून सिस्टम पहचानकर कैंसर कोशिकाओं पर हमला करता है। इस प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद ली जाती है। सबसे पहले मरीज का ट्यूमर सैंपल लिया जाता है। फिर AI उस सैंपल का विश्लेषण कर यह तय करता है कि मरीज के कैंसर सेल्स में कौन से एंटीजन मौजूद हैं। इसके बाद, उसी एंटीजन के आधार पर mRNA तैयार किया जाता है, जिसे मरीज के शरीर में डाला जाता है। यह mRNA इम्यून सिस्टम को सक्रिय करता है, जिससे वह कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने लगता है।

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