गहलोत का तीखा प्रहार: मुख्य सचिव सुधांश पंत की दिल्ली प्रतिनियुक्ति पर सवाल, बोले- सीएम भजनलाल शर्मा की स्थिति भी ऐसी न हो जाए; वसुंधरा राजे को घर बैठाने पर अफसोस, बीजेपी कार्यक्रमों को इवेंट की तरह चला रही सरकार
पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने मुख्य सचिव सुधांश पंत की अचानक दिल्ली प्रतिनियुक्ति पर चिंता जताई, कहा- कहीं सीएम भजनलाल शर्मा की स्थिति ऐसी न हो जाए; वसुंधरा राजे को घर बैठाने पर अफसोस, भाजपा कार्यक्रमों को इवेंट बता निशाना साधा।
राजस्थान की सियासत में एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बेबाकी ने हलचल मचा दी है। मंगलवार शाम को उदयपुर के सर्किट हाउस में मीडिया से अनौपचारिक बातचीत के दौरान गहलोत ने वर्तमान भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव (सीएस) सुधांश पंत की अचानक दिल्ली प्रतिनियुक्ति पर चिंता जताई और चेतावनी दी कि कहीं यह स्थिति मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की न हो जाए। साथ ही, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की अनदेखी पर अफसोस जताते हुए कहा कि वे योग्य नेता थीं, न जाने उन्हें घर क्यों बैठा दिया गया। गहलोत ने सरकार के शहरी सेवा शिविरों की मॉनिटरिंग पर भी सवाल उठाए और विपक्ष की भूमिका निभाने का ऐलान किया।
मुख्य सचिव सुधांश पंत की दिल्ली ट्रांसफर पर गहलोत की चिंता: राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) के वरिष्ठ अधिकारी सुधांश पंत को हाल ही में मुख्य सचिव के पद पर नियुक्त किया गया था। उनकी नियुक्ति के बाद से ही वे राज्य सरकार के कई महत्वपूर्ण फैसलों में अहम भूमिका निभा रहे थे। लेकिन अचानक दिल्ली में केंद्र सरकार के किसी विभाग में प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने की खबर ने राजनीतिक गलियारों में सनसनी फैला दी। इस कदम को विपक्ष ने सत्ता पक्ष की आंतरिक कलह का संकेत माना है।पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "यह जानकारी अचानक सामने आई। मुझे चिंता है कि यह स्थिति मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की न हो जाए।" गहलोत ने शर्मा पर तंज कसते हुए जोड़ा, "इनको पहली बार मौका मिला, पहली बार मुख्यमंत्री बने, पहली बार के एमएलए हैं। भगवान ने इनको मौका दे दिया है और वह व्यक्ति ऐसा है कि समझ नहीं पा रहा है।" उनका यह बयान मुख्यमंत्री की अनुभवहीनता पर सीधा हमला था। गहलोत ने इशारा किया कि पंत जैसे अनुभवी नौकरशाह को हटाने से प्रशासनिक अस्थिरता बढ़ेगी, जो अंततः शर्मा सरकार की छवि को प्रभावित कर सकती है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंत की प्रतिनियुक्ति केंद्र-राज्य संबंधों के दबाव या आंतरिक सिफारिशों का नतीजा हो सकती है। लेकिन गहलोत ने इसे भाजपा सरकार की कमजोरी का प्रतीक बताया, जो सत्ता संभालने के एक साल बाद भी स्थिरता हासिल नहीं कर पाई है।