करोड़ों का घोटाला: जल जीवन मिशन में फर्जी टेंडर और भ्रष्टाचार के आरोपों में सीनियर IAS सुबोध अग्रवाल सहित 18 अफसरों के खिलाफ ACB जांच को मंजूरी
राजस्थान में जल जीवन मिशन के 900 करोड़ के कथित घोटाले में रिटायरमेंट से सिर्फ 21 दिन दूर सीनियर IAS सुबोध अग्रवाल सहित 18 अधिकारियों के खिलाफ ACB को जांच की मंजूरी मिली। भाजपा विधायक देवी सिंह शेखावत के RAS भाई गोपाल सिंह से भी पूछताछ होगी। टेंडर में फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं।
जयपुर। राजस्थान में जल जीवन मिशन (जेजेएम) से जुड़े एक बड़े घोटाले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। करीब 900 करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले में फर्जी टेंडर, अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। राज्य सरकार ने इन आरोपों की जांच के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) की धारा 17A के तहत तत्कालीन जलदाय विभाग के एसीएस (अतिरिक्त मुख्य सचिव) सुबोध अग्रवाल सहित कुल 18 अधिकारियों के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को जांच की मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी मुख्यमंत्री स्तर से जारी की गई है, जो मामले की गंभीरता को दर्शाती है।
घोटाले का पृष्ठभूमि और आरोप जल जीवन मिशन एक महत्वाकांक्षी केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर को नल से जल उपलब्ध कराना है। राजस्थान में इस योजना के तहत सैकड़ों करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन कथित तौर पर टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार हुआ। जांच एजेंसियों के अनुसार, टेंडर आवंटन में निम्नलिखित अनियमितताएं सामने आई हैं:फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल: कई ठेकेदारों को फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र और वित्तीय क्षमता के दस्तावेज दिखाकर टेंडर दिए गए। जांच से बचाव: अधिकारियों ने जांच के दौरान दस्तावेज छिपाए और गुमराह करने की कोशिश की। रिश्वतखोरी और साठगांठ: ठेकेदारों और अधिकारियों के बीच साठगांठ से अनुचित लाभ लिया गया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा। कुल राशि: एजेंसियों का दावा है कि इस घोटाले का आकार लगभग 900 करोड़ रुपये का है, जो योजना के बजट का एक बड़ा हिस्सा है। यह मामला 2023 में सामने आया था, जब ACB ने प्रारंभिक जांच शुरू की। अब तक की जांच में 12 अधिकारियों के खिलाफ पहले ही मंजूरी मिल चुकी थी, और मंगलवार (9 दिसंबर 2025) को शेष 6 अधिकारियों सहित कुल 18 के खिलाफ हरी झंडी मिल गई। इनमें सीनियर आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल का नाम प्रमुख है, जो जलदाय विभाग के तत्कालीन एसीएस थे।