राजस्थान की जीवनरेखा अरावली पर संकट सुप्रीम कोर्ट का फैसला बना 'मौत का फरमान'.

सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में पर्यावरण मंत्रालय की समिति की सिफारिश स्वीकार कर अरावली पहाड़ियों की नई परिभाषा तय की है, जिसमें केवल स्थानीय स्तर से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली भू-आकृतियों को ही अरावली माना जाएगा। इससे अरावली का लगभग 90% हिस्सा (ज्यादातर 30-80 मीटर ऊंचाई वाला) संरक्षण के दायरे से बाहर हो सकता है, जिससे खनन और निर्माण के रास्ते खुल सकते हैं।

Basanti Parmar
Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
December 14, 2025 • 4:33 PM  172
राजस्थान
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राजस्थान की जीवनरेखा अरावली पर संकट सुप्रीम कोर्ट का फैसला बना 'मौत का फरमान'.
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14 Dec 2025
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राजस्थान की जीवनरेखा अरावली पर संकट सुप्रीम कोर्ट का फैसला बना 'मौत का फरमान'.

जयपुर: दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में शुमार अरावली पर्वतमाला इन दिनों गंभीर खतरे से जूझ रही है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में पर्यावरण मंत्रालय की प्रस्तावित परिभाषा को स्वीकार किए जाने के बाद इस प्राचीन श्रृंखला का बड़ा हिस्सा संरक्षण के दायरे से बाहर होने का खतरा मंडरा रहा है। कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को दिए अपने आदेश में स्पष्ट किया कि केवल उन भू-आकृतियों को अरावली पहाड़ी माना जाएगा, जिनकी ऊंचाई स्थानीय स्तर से कम से कम 100 मीटर अधिक हो। इस फैसले से अरावली का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हो सकता है, क्योंकि अधिकतर क्षेत्रों में ऊंचाई 30 से 80 मीटर के बीच है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय अरावली के लिए 'डेथ वारंट' की तरह है, जो न केवल इस पर्वतमाला को खनन माफियाओं के हवाले कर देगा, बल्कि राजस्थान को रेगिस्तान में बदलने की प्रक्रिया को तेज कर सकता है.

अरावली की नई परिभाषा: क्या है विवाद का केंद्र?

पर्यावरण मंत्रालय की ओर से प्रस्तुत इस नई परिभाषा के मुताबिक, अरावली जिलों में स्थित कोई भी भूमि तब तक पहाड़ी नहीं मानी जाएगी, जब तक उसकी ऊंचाई 100 मीटर से अधिक न हो। यदि ऐसी कई आकृतियां 500 मीटर की दूरी पर हों, तो उन्हें एक श्रृंखला के रूप में देखा जाएगा। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि वैज्ञानिक मैपिंग पूरी होने तक कोई नई खनन लीज जारी नहीं की जाएगी।

Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

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