राजस्थान में पंचायती राज चुनाव टलेंगे या होंगे?हाईकोर्ट के एक फैसले पर टिकी सबकी नजरें..

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर नया अपडेट सामने आया है। राज्य सरकार ने चुनाव टालने के लिए हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया है, जिस पर 11 मई को सुनवाई होगी। वहीं, अवमानना याचिकाओं पर 18 मई को सुनवाई तय हुई है। सरकार ने OBC आरक्षण, शिक्षकों की ड्यूटी, गर्मी और अन्य व्यावहारिक कारणों का हवाला देते हुए अतिरिक्त समय मांगा है।

Basanti Parmar
Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
May 4, 2026 • 11:02 AM  16
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राजस्थान में पंचायती राज चुनाव टलेंगे या होंगे?हाईकोर्ट के एक फैसले पर टिकी सबकी नजरें..
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राजस्थान में पंचायती राज चुनाव टलेंगे या होंगे?हाईकोर्ट के एक फैसले पर टिकी सबकी नजरें..

राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार द्वारा चुनाव टालने की मांग के बाद अब मामला राजस्थान हाईकोर्ट में पहुंच चुका है। हाईकोर्ट ने इस पर सुनवाई के लिए 11 मई की तारीख तय की है, जिससे पूरे प्रदेश की नजरें इस फैसले पर टिकी हुई हैं।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, राज्य सरकार ने अदालत में एक प्रार्थना पत्र पेश कर चुनाव करवाने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की है। सरकार का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में निर्धारित समयसीमा के भीतर चुनाव कराना संभव नहीं है। खासतौर पर ओबीसी वर्ग के लिए सीटों के पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो पाई है, जो चुनाव में देरी का बड़ा कारण बताया जा रहा है।

अवमानना याचिकाओं पर भी सुनवाई

इस पूरे मामले में पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिरिराज सिंह देवंदा द्वारा दायर अवमानना याचिकाएं भी चर्चा में हैं। इन याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने 18 मई को अगली सुनवाई तय की है। अदालत ने साफ किया है कि सरकार के प्रार्थना पत्र और अवमानना याचिकाओं की सुनवाई अलग-अलग बेंच द्वारा की जाएगी, यानी दोनों मामलों को एक साथ नहीं सुना जाएगा।

पहले क्या दिया था हाईकोर्ट ने आदेश?

गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने नवंबर 2025 में आदेश दिया था कि 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव पूरे करा लिए जाएं। लेकिन तय समयसीमा बीत जाने के बाद भी चुनाव नहीं हो पाए, जिसके चलते अब सरकार ने अतिरिक्त समय मांगा है।

सरकार ने क्यों मांगा समय?

सरकार ने अपने प्रार्थना पत्र में कई व्यावहारिक कारण गिनाए हैं—

OBC आरक्षण का पुनर्निर्धारण अभी लंबित है

12 जिला परिषद और 130 पंचायत समितियों का कार्यकाल इस साल खत्म हो रहा है

कई निकायों का कार्यकाल पहले ही पूरा हो चुका है

इसके अलावा सरकार ने यह भी कहा है कि चुनावी प्रक्रिया में बड़ी संख्या में शिक्षकों की ड्यूटी लगती है, जिससे शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित होती है।

मौसम और अन्य कारण भी बने बाधा

सरकार ने यह भी तर्क दिया है कि—

मई-जून में भीषण गर्मी के कारण चुनाव कराना मुश्किल होगा

जुलाई से सितंबर तक किसान खेती में व्यस्त रहते हैं (मानसून सीजन)

इसके बाद शिक्षकों के अवकाश और त्योहारी सीजन भी चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं

अब क्या होगा आगे?

अब इस पूरे मामले में सबसे अहम तारीख 11 मई है, जब हाईकोर्ट यह तय करेगा कि चुनाव समय पर कराए जाएंगे या सरकार को अतिरिक्त समय दिया जाएगा। इस फैसले का असर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों पर पड़ेगा।

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन इतना तय है कि आने वाले दिनों में कोर्ट का फैसला इस मुद्दे की दिशा तय करेगा। चुनाव समय पर होंगे या टलेंगे—इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

Basanti Parmar

Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

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