जाते-जाते देवदूत बन गई 9 साल की बच्ची, 3 लोगों को दिया 'नया जन्म'; पढ़ें एक पिता के सबसे मुश्किल फैसले की कहानी
जोधपुर एम्स में 9 साल की ब्रेन डेड बच्ची अंजलि ने अंगदान कर 3 लोगों को नया जीवन दिया है। ग्रीन कॉरिडोर के जरिए जयपुर के एसएमएस अस्पताल भेजे गए लिवर और किडनी। पढ़ें पूरी भावुक कर देने वाली खबर।



राजस्थान के जोधपुर एम्स (AIIMS Jodhpur) से एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। पचपदरा की रहने वाली 9 साल की मासूम अंजलि भले ही इस दुनिया से विदा हो गई, लेकिन जाते-जाते वह तीन लोगों की जिंदगी रोशन कर गई। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद अंजलि को डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया था। इसके बाद परिजनों ने भारी मन से एक बड़ा और नेक फैसला लेते हुए अपनी लाडली के अंगदान (Organ Donation) की सहमति दी। अंजलि की दो किडनी और लिवर ने तीन मरीजों को नया जीवन दिया है।
स्कूल जाते समय हुआ था दर्दनाक हादसा
बीते 19 अगस्त को अंजलि हमेशा की तरह खुशी-खुशी स्कूल जा रही थी। तभी सड़क पार करते समय एक तेज रफ्तार डंपर ने उसे टक्कर मार दी। इस भयानक हादसे में अंजलि के सिर में गंभीर चोटें आईं। उसे तुरंत इलाज के लिए जोधपुर के एम्स में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उसे बचाने की हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन 27 अगस्त को डॉक्टरों की टीम ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
डॉक्टर बनने का था सपना, मौत के बाद भी कर गई 'इलाज'
अंजलि के पिता अशोक दास पेशे से एक ड्राइवर हैं और मां हाउसवाइफ हैं। अशोक बताते हैं कि उनकी शादी 2003 में हुई थी और काफी मन्नतों के बाद 2015 में उनके घर बेटे ने जन्म लिया था। उनकी लाडली अंजलि चौथी कक्षा की छात्रा थी और उसका सपना बड़ी होकर डॉक्टर बनने का था। भले ही अंजलि का डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह गया हो, लेकिन उसने अपने अंगों से तीन लोगों को जीवनदान देकर किसी देवदूत से कम काम नहीं किया है। डॉक्टरों ने बताया कि शुरुआत में परिजन अंगदान के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन अस्पताल प्रशासन की ओर से काउंसलिंग और समझाने के बाद वे इस पुनीत कार्य के लिए राजी हो गए।
3 मरीजों को मिला जीवनदान, बना ग्रीन कॉरिडोर
शनिवार सुबह 11 बजे जोधपुर से जयपुर तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। अंजलि का एक लिवर और एक किडनी इस ग्रीन कॉरिडोर के जरिए तेजी से जयपुर के SMS अस्पताल पहुंचाए गए। वहीं, दूसरी किडनी को जोधपुर एम्स में ही भर्ती एक जरूरतमंद मरीज को ट्रांसप्लांट किया जाएगा।
क्या होता है ब्रेन डेड और कैसे बचते हैं अंग?
जोधपुर एम्स के सुपरिटेंडेंट डॉ. अभिषेक भारद्वाज ने बताया कि ब्रेन शरीर के सभी अंगों को कंट्रोल करता है, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण फंक्शन सांस लेना है। जब कोई मरीज ब्रेन डेड हो जाता है तो उसका दिमाग काम करना बंद कर देता है। ऐसी स्थिति में वेंटिलेटर के जरिए ऑक्सीजन शरीर के अंगों तक आर्टिफिशियल तरीके से पहुंचाई जाती है। इससे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को कुछ समय तक के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है, ताकि उन्हें निकालकर दूसरे जरूरतमंद मरीज के शरीर में ट्रांसप्लांट किया जा सके।
बता दें कि जोधपुर एम्स ने इसी साल मार्च 2024 में मृतक अंगदान कार्यक्रम (Deceased Organ Donation Program) की शुरुआत की थी। इतने कम समय में यहां से अब तक 37 ऑर्गन डोनेट किए जा चुके हैं, जो कई परिवारों के लिए वरदान साबित हुए हैं।











































