बीकानेर में बढ़ते नशे की तस्करी पर अदालत की गंभीर चिंता: युवाओं के अपराध में शामिल होने पर जताया दुख, जमानत अर्जियां खारिज
बीकानेर की एनडीपीएस कोर्ट ने बढ़ते नशे की तस्करी और युवाओं की संलिप्तता पर गहरी चिंता जताई है। डोडा पोस्त के साथ पकड़े गए आरोपी फरमान खोखर की जमानत याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि क्षेत्र में मादक पदार्थों की तस्करी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसी तरह 5 करोड़ की फिरौती मांगने के मामले में भी एक आरोपी की जमानत अस्वीकार कर दी गई।
बीकानेर (राजस्थान)। राजस्थान के बीकानेर जिले में नशे की तस्करी और उसके सेवन की बढ़ती घटनाओं ने अब न्यायिक स्तर पर भी गंभीर चिंता पैदा कर दी है। एनडीपीएस (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस) कोर्ट ने हाल ही में एक आदेश में स्पष्ट रूप से इस मुद्दे पर अपनी पीड़ा व्यक्त की है। कोर्ट ने कहा कि क्षेत्र में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और क्रय-विक्रय के मामलों में दिन-प्रतिदिन वृद्धि हो रही है, और चिंताजनक बात यह है कि इसमें नौजवान युवा बड़ी संख्या में संलिप्त हो रहे हैं। यह समाज के लिए एक गंभीर खतरा बनता जा रहा है।
डोडा पोस्त तस्करी मामले में जमानत खारिज विशिष्ट न्यायाधीश अनुभव सिडाना की एनडीपीएस कोर्ट ने गंगाशहर क्षेत्र के एक मामले में आरोपी फरमान खोखर की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट के आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि "आजकल इस इलाके में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी व क्रय-विक्रय करने के आपराधिक प्रकरणों की संख्या में दिनों-दिन बढ़ोतरी होती जा रही है। आपराधिक गतिविधियों में नौजवान युवक संलिप्त होकर अवैध मादक पदार्थ की तस्करी का कृत्य कर रहे हैं।"कोर्ट ने आगे कहा कि मामले की गंभीरता, तथ्यों और आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए जमानत देना न्यायोचित नहीं होगा। इस फैसले से कोर्ट ने न केवल कानूनी प्रक्रिया का पालन किया, बल्कि समाज को एक मजबूत संदेश भी दिया कि नशे की तस्करी जैसे अपराधों में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
यह मामला 8 अगस्त का है, जब गंगाशहर पुलिस ने भीनासर नाके के पास संदिग्ध हालत में फरमान खोखर, गणेश उर्फ विजय बारुपा और सदीक खान को पकड़ा था। तीनों के पास पीठू बैग थे, जिनमें बड़ी मात्रा में डोडा पोस्त बरामद हुआ था। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। इसी प्रकरण में फरमान खोखर ने जमानत के लिए अर्जी दी थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। राज्य की ओर से इस मामले में लोक अभियोजक एडवोकेट हरीश भट्टड़ ने प्रभावी पैरवी की।