भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हुई रवाना... PM मोदी ने दिखाई हरी झंडी, जानिए बिना डीजल कैसे दौड़ती है ये ट्रेन

भारतीय रेलवे ने इतिहास रच दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद से देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन को हरी झंडी दिखाई।

Kashish Sain
Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
July 17, 2026 • 4:52 PM  4
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राजस्थान
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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हुई रवाना... PM मोदी ने दिखाई हरी झंडी, जानिए बिना डीजल कैसे दौड़ती है ये ट्रेन
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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हुई रवाना... PM मोदी ने दिखाई हरी झंडी, जानिए बिना डीजल कैसे दौड़ती है ये ट्रेन

भारतीय रेलवे ने स्वच्छ और आधुनिक परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाते हुए देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन की शुरुआत कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई को हरियाणा के जींद से इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जहां हाइड्रोजन तकनीक से ट्रेनों का संचालन शुरू हो चुका है।

यह पहल भारतीय रेलवे के ग्रीन रेलवे मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है। इसका उद्देश्य डीजल पर निर्भरता कम करना, कार्बन उत्सर्जन घटाना और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देना है। 

कैसे काम करती है हाइड्रोजन ट्रेन?

इस ट्रेन में पारंपरिक डीजल इंजन की जगह हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। फ्यूल सेल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली उत्पन्न होती है। यही बिजली ट्रेन को चलाती है।

इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे धुआं या हानिकारक गैसें नहीं निकलतीं। इसका मुख्य उत्सर्जन केवल पानी की भाप (Water Vapour) होता है, जिससे पर्यावरण पर असर बेहद कम पड़ता है।

जींद से सोनीपत के बीच चलेगी ट्रेन

देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन फिलहाल हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच करीब 89 किलोमीटर लंबे रूट पर संचालित होगी। यह ट्रेन लगभग 2 घंटे में अपनी यात्रा पूरी करेगी और रास्ते में 12 स्टेशनों पर रुकेगी। ट्रेन के संचालन के लिए जींद में विशेष हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन भी तैयार किया गया है।

क्या हैं ट्रेन की खासियतें?

  • कुल 10 कोच।
  • 2 हाइड्रोजन पावर्ड ड्राइविंग कार और 8 ट्रेलर कोच।
  • लगभग 2,600 यात्रियों की क्षमता।
  • डिजाइन स्पीड 120 किमी प्रति घंटा, जबकि परिचालन गति करीब 75 किमी प्रति घंटा।
  • आधुनिक कोच, आरामदायक सीटें और बेहतर वेंटिलेशन।
  • हाइड्रोजन लीकेज, धुआं और तापमान की निगरानी के लिए विशेष सेंसर।
  • 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत विकसित तकनीक।

भारत के लिए क्यों है अहम?

हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत भारत के लिए केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बड़ा कदम है। इससे भविष्य में डीजल की खपत कम होगी, कार्बन उत्सर्जन घटेगा और रेलवे का संचालन अधिक टिकाऊ बनेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तकनीक का विस्तार होता है, तो आने वाले वर्षों में भारतीय रेलवे दुनिया की सबसे आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल रेल सेवाओं में शामिल हो सकता है।

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन यह संकेत देती है कि भविष्य की रेल यात्रा सिर्फ तेज ही नहीं, बल्कि स्वच्छ, सुरक्षित और ऊर्जा के बेहतर उपयोग पर आधारित भी होगी।

Kashish Sain

Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

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