बाहरी राज्यों के नागरिक: अगर आप किसी दूसरे राज्य के निवासी हैं, लेकिन राजस्थान में रहकर लिव-इन रिलेशनशिप में हैं, तब भी आपको रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
प्रदेश से बाहर रहने वाले राजस्थानी: अगर राजस्थान का कोई मूल निवासी प्रदेश की सीमा से बाहर किसी अन्य राज्य में लिव-इन में रहता है, तो उस पर भी यह नियम लागू होगा।
विदेशी नागरिकों को छूट: राज्य के विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने स्पष्ट किया है कि एजुकेशन वीजा या अन्य कारणों से अस्थाई रूप से राजस्थान में रह रहे विदेशी नागरिकों पर यह कानून लागू नहीं होगा, क्योंकि उन्हें तय समय के बाद अपने देश लौटना होता है।
इन स्थितियों में नहीं हो सकेगा लिव-इन रजिस्ट्रेशन
कानून में कुछ सख्त पाबंदियां भी लगाई गई हैं। निम्नलिखित स्थितियों में लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन मान्य नहीं होगा:
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पहले से शादीशुदा: यदि दोनों में से कोई भी एक पार्टनर पहले से शादीशुदा है, तो वे लिव-इन का रजिस्ट्रेशन नहीं करा सकेंगे।
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निषिद्ध रिश्तेदारी: अगर दोनों पार्टनर कानून द्वारा परिभाषित 'पाबंदी वाली नातेदारी' (Prohibited Degree of Relationship) के दायरे में आते हैं।
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दबाव या धोखा: यदि किसी पार्टनर की सहमति जबरन, बलपूर्वक, गलत प्रभाव या दबाव डालकर ली गई है, तो ऐसे लिव-इन का दावा और रजिस्ट्रेशन खारिज कर दिया जाएगा।
लिव-इन से जन्मे बच्चों को मिलेगी कानूनी मान्यता
इस बिल का एक महत्वपूर्ण पहलू बच्चों के अधिकारों से जुड़ा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि रजिस्टर्ड लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा होने वाले बच्चों को कानूनी रूप से पूरी तरह वैध (Legitimate) माना जाएगा और उन्हें समान अधिकार प्राप्त होंगे।
कानून में शामिल हैं 18 विशेष धाराएं
यूसीसी बिल में धारा 384 से लेकर 401 तक कुल 18 धाराएं केवल लिव-इन रिलेशनशिप को समर्पित हैं। इन धाराओं में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया, संतानों के अधिकार, और रजिस्ट्रेशन न कराने की स्थिति में सजा व जुर्माने के प्रावधानों का विस्तार से जिक्र किया गया है।
क्या है राजस्थान UCC बिल का मुख्य उद्देश्य?
सरकार ने 400 पन्नों के इस बिल के उद्देश्यों में बताया है कि यह विधेयक सभी नागरिकों के पर्सनल लॉ में समता, न्याय और एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है।
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इससे राज्य में एक एकीकृत विधिक ढांचे की स्थापना होगी।
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बिल का लक्ष्य पंथनिरपेक्षता, लैंगिक न्याय और सामाजिक सुधार के सिद्धांतों को मजबूत करना है।
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इसके लागू होने से प्रदेश के सभी निवासियों पर शादी, तलाक और उत्तराधिकार के एक समान नियम लागू होंगे, जिससे समाज की एकता और अखंडता को बढ़ावा मिलेगा।