रोडवेज बस स्टैंड पर प्राचीन बावड़ी की दीवार ढहने से हड़कंप, कर्मचारियों की गाड़ियां और कमरा बावड़ी में समाया.
जोधपुर के राईकाबाग रोडवेज बस स्टैंड पर देर रात एक प्राचीन बावड़ी की दीवार ढहने से हड़कंप मच गया। पास का एक कमरा और कर्मचारियों की गाड़ियां बावड़ी में समा गईं। एक युवक कुछ मिनट पहले कमरे से निकलने के कारण बाल-बाल बचा। प्रशासन ने बचाव कार्य शुरू कर क्षेत्र को सुरक्षित किया। हादसे ने ऐतिहासिक धरोहरों के रखरखाव पर सवाल उठाए।
Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
September 6, 2025 • 12:25 PM 27
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राजस्थान
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“रोडवेज बस स्टैंड पर प्राचीन बावड़ी की दीवार ढहने से हड़कंप, कर्मचारियों की गाड़ियां और कमरा बावड़ी में समाया.”
जोधपुर शहर में देर रात एक बड़ी घटना ने स्थानीय लोगों और प्रशासन को हिलाकर रख दिया। राईकाबाग स्थित जोधपुर रोडवेज बस स्टैंड पर बनी एक प्राचीन बावड़ी की दीवार अचानक ढह गई, जिसके कारण पास में बना एक कमरा और कर्मचारियों की कई गाड़ियां बावड़ी में समा गईं। इस हादसे ने इलाके में दहशत फैला दी, हालांकि गनीमत रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई।
घटना का विवरण
जानकारी के अनुसार, यह हादसा देर रात उस समय हुआ जब राईकाबाग बस स्टैंड के पास स्थित प्राचीन बावड़ी की दीवार अचानक भरभराकर गिर गई। इस बावड़ी का ऐतिहासिक महत्व है और यह बस स्टैंड परिसर का हिस्सा है। दीवार के ढहने से पास में बना एक कमरा पूरी तरह से बावड़ी में धंस गया। साथ ही, कर्मचारियों की कई गाड़ियां, जो पास में खड़ी थीं, भी मलबे के साथ बावड़ी में गिर गईं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जिस कमरे में यह हादसा हुआ, उसमें से एक युवक कुछ ही मिनट पहले बाहर निकला था, जिसके कारण वह बाल-बाल बच गया।
इस घटना ने बस स्टैंड के कर्मचारियों और आसपास के लोगों में डर का माहौल पैदा कर दिया। रात के समय हुई इस घटना के बाद तुरंत प्रशासन और पुलिस को सूचित किया गया। मौके पर पहुंची पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए तत्काल कदम उठाए। मलबे को हटाने और बावड़ी में गिरी गाड़ियों को निकालने के लिए बचाव कार्य शुरू किया गया। प्रारंभिक जांच में दीवार के पुराने होने और संभवतः रखरखाव की कमी को हादसे का कारण माना जा रहा है।
प्राचीन बावड़ी का महत्व
जोधपुर की यह प्राचीन बावड़ी शहर की ऐतिहासिक धरोहर का हिस्सा है। बावड़ियां राजस्थान की संस्कृति और वास्तुकला का महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं, जो पानी के संरक्षण के लिए बनाई गई थीं। हालांकि, समय के साथ इन संरचनाओं के रखरखाव पर ध्यान कम दिया गया, जिसके कारण कई बावड़ियां जर्जर हो चुकी हैं। इस घटना ने एक बार फिर ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और रखरखाव की आवश्यकता पर सवाल खड़े किए हैं।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
हादसे की सूचना मिलते ही जोधपुर जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई शुरू की। जिला कलेक्टर और पुलिस अधिकारियों ने मौके का मुआयना किया और स्थिति का जायजा लिया। प्रारंभिक तौर पर, बावड़ी के आसपास के क्षेत्र को सील कर दिया गया है ताकि कोई और हादसा न हो। साथ ही, विशेषज्ञों की एक टीम को बावड़ी और आसपास की संरचनाओं की स्थिति की जांच के लिए नियुक्त किया गया है। प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि प्रभावित कर्मचारियों की गाड़ियों के नुकसान की भरपाई के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे।
स्थानीय लोगों की चिंता
इस घटना ने स्थानीय लोगों में ऐतिहासिक संरचनाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कई लोगों का मानना है कि यदि समय रहते बावड़ी और इसकी दीवारों का रखरखाव किया गया होता, तो इस हादसे को टाला जा सकता था। कुछ लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि शहर की अन्य पुरानी संरचनाओं की भी जांच की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
जोधपुर रोडवेज बस स्टैंड पर हुआ यह हादसा न केवल एक स्थानीय घटना है, बल्कि यह ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की आवश्यकता को भी उजागर करता है। प्रशासन ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन यह घटना शहर के अन्य पुराने ढांचों की स्थिति पर भी सवाल उठाती है। फिलहाल, बचाव कार्य जारी है और जांच के बाद ही हादसे के सटीक कारणों का पता चल सकेगा।