जयपुर में शिवभक्ति की अनूठी झलक ,51 लीटर गन्ने का रस और हजारों लीटर गंगाजल से अभिषेक
सावन के अंतिम सोमवार को जयपुर के शिवालयों, विशेषकर ताड़केश्वर महादेव मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी, जहां जलाभिषेक, रुद्र पाठ और 56 भोग के साथ विशेष पूजा-अर्चना हुई। गलता जी से कांवड़ यात्राएं शुरू होकर शहर के मंदिरों तक पहुंचीं।
सावन के अंतिम सोमवार को जयपुर के शिवालयों में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह के पहले प्रहर से ही श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ को जल, दूध, और बेलपत्र अर्पित करने के लिए मंदिरों में पहुंच रहे हैं। शहर का माहौल भक्ति और उमंग से सराबोर है, जहां हर तरफ 'बम-बम भोले' के जयकारे गूंज रहे हैं। खासतौर पर चौड़ा रास्ता स्थित ताड़केश्वर महादेव मंदिर में भक्तों की सबसे ज्यादा भीड़ देखने को मिली। गलता जी से शुरू हुई कांवड़ यात्राएं भी सुबह-सुबह विभिन्न मंदिरों तक पहुंचीं, जिसने इस पवित्र दिन को और भी खास बना दिया।
ताड़केश्वर महादेव मंदिर में विशेष आयोजन
ताड़केश्वर महादेव मंदिर में सुबह 3 बजे भगवान शिव का श्रृंगार कर मंगला आरती की गई। इसके बाद पंचामृत और गंगाजल से शिवलिंग का विशेष अभिषेक किया गया। मंदिर के पुजारी अमित पाराशर ने बताया कि सुबह 4 बजे से मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए, और जलाभिषेक का क्रम शुरू हुआ, जो शाम 4 बजे तक चलेगा।
पाराशर ने आगे बताया, "आज शाम को मंदिर में सवा लाख बेल पत्रों से भगवान शिव की विशेष झांकी सजाई जाएगी। भोलेनाथ को 56 भोग अर्पित किए जाएंगे। साथ ही, 251 लीटर देशी गाय के घी, 51 लीटर दूध, 51 लीटर शहद, और 51 लीटर गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक किया गया। दिनभर सहस्र स्वर वैदिक विद्वानों द्वारा रुद्र पाठ किया जा रहा है।" रात्रि आरती के बाद भक्तों को प्रसाद वितरण भी होगा।