डॉक्टर बोले- जब साध्वी को लाए तो हलचल नहीं थी: प्रेम बाईसा जुकाम-खांसी को लेकर कई बार हॉस्पिटल दिखाने आई थीं; SIT ने स्टाफ से की गहन पूछताछ
जोधपुर में प्रसिद्ध कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की 28 जनवरी 2026 को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। जुकाम-खांसी के इलाज में लगे इंजेक्शन के बाद वे बेहोश हुईं और अस्पताल में मृत घोषित की गईं। पिता का आरोप है कि इंजेक्शन से तबीयत बिगड़ी, जबकि पोस्टमॉर्टम में आंतें लाल मिलने से जहर की शंका जताई गई। मौत के कुछ घंटे बाद सोशल मीडिया पर सुसाइड नोट जैसी पोस्ट वायरल हुई। SIT ने अस्पताल, आश्रम स्टाफ, कंपाउंडर, पिता आदि से पूछताछ की है, FSL रिपोर्ट का इंतजार है। मामला हत्या, नेग्लिजेंस या अन्य एंगल पर जांच में है।
जोधपुर में प्रसिद्ध कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला लगातार गहराता जा रहा है। 28 जनवरी 2026 को उनकी मौत के बाद पुलिस ने विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है, जो विभिन्न एंगल से जांच कर रही है। मंगलवार को SIT की टीम प्रेक्षा हॉस्पिटल पहुंची, जहां साध्वी को तबीयत बिगड़ने पर लाया गया था। एसआईटी इंचार्ज एसीपी वेस्ट छवि शर्मा ने टीम के साथ अस्पताल स्टाफ और डॉक्टरों से विस्तृत पूछताछ की।
अस्पताल में क्या हुआ? डॉक्टर का बयान
अस्पताल के डॉक्टर प्रवीण कुमार जैन ने SIT को बताया कि साध्वी प्रेम बाईसा पिछले कुछ महीनों में जुकाम, खांसी और गले की शिकायत लेकर कई बार अस्पताल आई थीं। उन्होंने कहा, "मेरे लिए यह कहना मुश्किल है कि उन्हें अस्थमा जैसी कोई गंभीर बीमारी थी। मैंने उन्हें कई दिनों से नहीं देखा था और कोई नया उपचार भी नहीं लिखा था।"डॉक्टर ने आगे बताया कि साध्वी को लोकल कंपाउंडर से इंजेक्शन लगवाकर लाया गया था। जब उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, तो वे पूरी तरह कॉलैप्स (निढाल) हो चुकी थीं। डॉक्टर और स्टाफ ने उन्हें जांचा, लेकिन शरीर में कोई हलचल नहीं थी और वे अनकॉन्शियस (बेहोश) थीं। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।