राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में टीचर्स भर्ती पर बवाल: ग्रामीण स्वास्थ्य और पढ़ाई पर मंडराया खतरा?

राजस्थान सरकार के ग्रुप-2 स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स को मेडिकल कॉलेजों में टीचर्स बनाने के फैसले का ग्रुप-1 डॉक्टर्स ने विरोध किया, क्योंकि इससे मेडिकल एजुकेशन की गुणवत्ता और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

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Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor
August 31, 2025 • 12:02 PM  74
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राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में टीचर्स भर्ती पर बवाल: ग्रामीण स्वास्थ्य और पढ़ाई पर मंडराया खतरा?
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राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में टीचर्स भर्ती पर बवाल: ग्रामीण स्वास्थ्य और पढ़ाई पर मंडराया खतरा?

राजस्थान सरकार ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में टीचिंग स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए नया कदम उठाया है। नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) के दिशा-निर्देशों के तहत ग्रुप-2 के पोस्टग्रेजुएट (PG) स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स को उनके अनुभव के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में फेकल्टी (टीचर्स) के रूप में नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस फैसले से सरकार का मकसद मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई की गुणवत्ता को बेहतर करना और स्टूडेंट्स की पढ़ाई को पटरी पर लाना है।

लेकिन इस फैसले ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। ग्रुप-1 के डॉक्टर्स, जो राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन से जुड़े हैं, ने इस कदम का कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि बिना राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की परीक्षा के इस तरह सीधे टीचर्स की नियुक्ति से कई गंभीर समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।

ग्रुप-1 डॉक्टर्स की चिंता मेडिकल एजुकेशन और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर असर

राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन ने सरकार के सामने अपनी चिंताएं रखते हुए कहा है कि बिना RPSC परीक्षा के ग्रुप-2 के डॉक्टर्स को फेकल्टी बनाने से मेडिकल एजुकेशन की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ेगा। एसोसिएशन का कहना है कि ये स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स अभी ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में मरीजों को सेवाएं दे रहे हैं। अगर इन्हें मेडिकल कॉलेजों में टीचर्स के तौर पर स्थानांतरित किया गया, तो ग्रामीण इलाकों में मेडिकल सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित होंगी।

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