बाड़मेर में सियासी ड्रामे का नया मोड़: आलाकमान ने बदला रास्ता, समर्थकों में गुस्सा, हरीश चौधरी पर उमड़ा जनाक्रोश!

बाड़मेर में कांग्रेस की सभा से पहले सियासी ड्रामा तब शुरू हुआ, जब आलाकमान ने अचानक रास्ता बदलकर उतरलाई चौराहे पर स्वागत के लिए जुटे समर्थकों को निराश कर दिया। फूल-मालाओं के साथ इंतजार कर रहे कार्यकर्ता और महिलाएं दर्शक बनकर रह गए, क्योंकि काफिला सीधे सभा स्थल पहुंचा। समर्थकों का गुस्सा स्थानीय नेताओं पर फूटा, जिन्हें सियासी साजिश का जिम्मेदार ठहराया गया। लोग पुराने नेता की वापसी की मांग कर रहे हैं, मानते हुए कि बाड़मेर सीट जीतने के लिए उनकी जरूरत है। इस घटना ने कांग्रेस के भीतर गुटबाजी को उजागर किया, और जनाक्रोश ने सियासत को गर्म कर दिया।

Ashok Shera
Ashok Shera Official | Verified Expert • 11 Jun, 2026 Editor
May 26, 2025 • 1:17 PM  26
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बाड़मेर में सियासी ड्रामे का नया मोड़: आलाकमान ने बदला रास्ता,  समर्थकों में गुस्सा, हरीश चौधरी पर उमड़ा जनाक्रोश!
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26 May 2025
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बाड़मेर में सियासी ड्रामे का नया मोड़: आलाकमान ने बदला रास्ता,  समर्थकों में गुस्सा, हरीश चौधरी पर उमड़ा जनाक्रोश!

बाड़मेर में सियासी ड्रामा उस समय चरम पर पहुंच गया, जब कांग्रेस आलाकमान ने सभा स्थल पहुंचने के लिए रास्ता बदल लिया और पूर्व विधायक मेवाराम जैन के समर्थकों का स्वागत का सपना धरा का धरा रह गया। उतरलाई से सीधे सभा स्थल की ओर निकला आलाकमान का काफिला चौराहे पर इंतजार कर रहे समर्थकों को छोड़कर निकल गया, जिससे स्थानीय नेताओं की योजनाएं धूल में मिल गईं और समर्थक मायूस होकर केवल दर्शक बनकर रह गए। इस घटना ने बाड़मेर की सियासत में भूचाल ला दिया, और हरीश चौधरी के खिलाफ जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।

क्या हुआ बाड़मेर में?

बाड़मेर में कांग्रेस की सभा के लिए उतरलाई चौराहे पर मेवाराम जैन और अमीन खान के समर्थक सुबह से ही जोश के साथ जुटे थे। लोग अपने नेताओं—विशेष रूप से मेवाराम जैन—के समर्थन में स्वागत के लिए फूल-मालाएं लेकर तैयार थे। महिलाएं और कार्यकर्ता तपती धूप में भी उत्साह के साथ इंतजार कर रहे थे। लेकिन, कांग्रेस आलाकमान ने अचानक रास्ता बदल लिया और काफिला सीधे सभा स्थल पर पहुंच गया। चौराहे पर खड़े समर्थकों को इसकी भनक तक नहीं लगी, और उनका जोश ठंडा पड़ गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सब हरीश चौधरी की सियासी चाल का हिस्सा था। समर्थकों का आरोप है कि चौधरी ने आलाकमान को रास्ता बदलने के लिए उकसाया, ताकि मेवाराम जैन और उनके समर्थकों का स्वागत न हो सके। लोगों का गुस्सा इस कदर भड़का कि उन्होंने हरीश चौधरी के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और कहा, "हरीश चौधरी की तानाशाही नहीं चलेगी!" कुछ समर्थकों ने तो अपने गले में स्वागत के लिए लाए गए साफे तक खुद ही पहन लिए, क्योंकि उनका स्वागत का सपना अधूरा रह गया।

Ashok Shera Official | Verified Expert • 11 Jun, 2026 Editor

"द खटक" एडिटर-इन-चीफ

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