बेमौसम बारिश ने किसानों पर दोहरी मार खरीफ की तबाही के बाद रबी की उम्मीदें भी डूब गईं पानी में!

टोंक जिले में बेमौसम बारिश ने किसानों पर दोहरी मार की है। खरीफ फसलें (ज्वार, बाजरा, मूंग) पहले ही अतिवृष्टि से बर्बाद हो चुकी थीं, अब रबी की बुवाई के बीच सरसों-चने की फसलें जलमग्न होकर सड़ने लगी हैं। खेतों में पानी भर गया, नुकसान 50-70% तक अनुमानित। किसान आर्थिक संकट में, गिरदावरी और मुआवजे की मांग कर रहे हैं। प्रशासन ने सर्वे शुरू करने का आश्वासन दिया है।

Basanti Parmar
Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
October 29, 2025 • 3:38 PM  327
राजस्थान
NEWS CARD
Logo
बेमौसम बारिश  ने किसानों पर दोहरी मार खरीफ की तबाही के बाद रबी की उम्मीदें भी डूब गईं पानी में!
“बेमौसम बारिश ने किसानों पर दोहरी मार खरीफ की तबाही के बाद रबी की उम्मीदें भी डूब गईं पानी में!”
Favicon
Read more on thekhatak.com
29 Oct 2025
https://thekhatak.com/unseasonal-rain-double-blow-farmers-kharif-ruin-rabi-hopes-drowned-water-tonk
Google News
Copied
बेमौसम बारिश  ने किसानों पर दोहरी मार खरीफ की तबाही के बाद रबी की उम्मीदें भी डूब गईं पानी में!

टोंक, 29 अक्टूबर 2025: राजस्थान के टोंक जिले में किसानों का दुर्भाग्य थमने का नाम ही नहीं ले रहा। मानसून की विदाई के बाद भी बेमौसम बारिश ने एक बार फिर अन्नदाताओं की कमर तोड़ दी है। खरीफ सीजन में अतिवृष्टि से ज्वार, बाजरा, मूंग और उड़द जैसी फसलें लगभग चौपट हो चुकी थीं, और अब रबी की बुवाई के ठीक बीच में आई इस आफत ने सरसों और चने की फसलों को भी संकट में डाल दिया है। जिले के टोडारायसिंह उपखंड समेत कई ग्रामीण इलाकों में पिछले 48 घंटों से रुक-रुक कर हो रही रिमझिम और मूसलाधार बारिश ने खेतों को जलमग्न कर दिया है। किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फिर गया, और अब आर्थिक संकट की काली छाया मंडराने लगी है।

खरीफ की कड़वी यादें अभी ताजा, रबी पर भी बारिश का कहर

टोंक जिले में इस साल खरीफ सीजन बेहद विपरीत रहा। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में औसत से 200 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जिससे लगभग 80,000 हेक्टेयर में बोई गई फसलें—जैसे ज्वार (25,000 हेक्टेयर), मूंग (39,000 हेक्टेयर) और बाजरा (9,300 हेक्टेयर)—पूरी तरह बर्बाद हो गईं। खेतों में लगातार जलभराव से फसलें सड़ गईं, और किसानों को कर्ज चुकाने के लिए भी मजबूर होना पड़ा। कई किसानों ने बताया कि अतिवृष्टि ने न केवल फसलें नष्ट कीं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी घटा दी, जिससे रबी की तैयारी पहले से ही मुश्किल हो गई।लेकिन किस्मत ने फिर करवट ली। अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में, जब रबी की बुवाई जोरों पर थी, सुबह-सुबह बादल घिर आए और 15 घंटे से अधिक समय तक रिमझिम बारिश का सिलसिला चला। टोडारायसिंह क्षेत्र में तो हालात सबसे ज्यादा गंभीर हैं—खेतों में पानी भर गया, सरसों की बुवाई आधी-अधूरी रह गई, और जो फसलें बो चुकी थीं, वे जड़ से सड़ने लगीं। स्थानीय किसान रामस्वरूप गुर्जर ने बताया, "खेतों की मिट्टी अभी सूखी भी नहीं थी कि यह बारिश आ गई। सरसों का समय निकल गया, अब चने की फसल पर भी खतरा मंडरा रहा है। पिछले साल की कमाई खत्म, इस साल की उम्मीदें भी मिट्टी में मिल गईं।" जिले भर में सैकड़ों हेक्टेयर खेत प्रभावित हुए हैं, और विशेषज्ञों का अनुमान है कि नुकसान 50-70 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

Digital Archives

home Home amp_stories Web Stories local_fire_department Trending play_circle Videos mark_email_unread Newsletter