भीड़, बसें और ‘गलती से हुआ’ बहाना: क्या पब्लिक ट्रांसपोर्ट में महिलाएं सच में सुरक्षित हैं?
भीड़भाड़ वाले पब्लिक ट्रांसपोर्ट में महिलाओं की सुरक्षा एक बड़ा सवाल बनता जा रहा है। ‘गलती से हुआ’ जैसे बहाने अब सिस्टम की गंभीर खामियों की ओर इशारा कर रहे हैं।
देश के किसी भी बड़े शहर—दिल्ली, मुंबई, जयपुर या पटना—की तस्वीर लगभग एक जैसी दिखती है। भीड़भाड़ वाली बसें, लोकल ट्रेनें और रेलवे स्टेशन, जहां रोज़ लाखों लोग सफर करते हैं। लेकिन इसी भीड़ के बीच महिलाओं की सुरक्षा एक बड़ा सवाल बनकर खड़ा है।
अक्सर सामने आता है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ या अनुचित व्यवहार की घटनाएं होती हैं। कई बार आरोपी इसे “भीड़ थी, गलती से लग गया” कहकर बचने की कोशिश करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या हर बार ऐसा सिर्फ एक संयोग होता है या यह एक गंभीर सामाजिक समस्या बन चुकी है?
पब्लिक ट्रांसपोर्ट में बढ़ती असुरक्षा
रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और लोकल ट्रेनों में महिलाओं को अक्सर असहज स्थितियों का सामना करना पड़ता है। ‘लेडीज़ सीट’ होने के बावजूद कई जगह पुरुषों द्वारा उन पर कब्ज़ा कर लिया जाता है। विरोध करने पर भीड़ का बहाना या “गलती हो गई” जैसी सफाई देकर मामले को हल्का करने की कोशिश की जाती है।