बालोतरा अस्पताल में लापरवाही से युवक की मौत,सांसद उम्मेदाराम परिजनों और ग्रामीणों के साथ हॉस्पिटल के बाहर सोए

बालोतरा के निजी अस्पताल में गलत इंजेक्शन से युवक मालाराम की मौत, परिजनों का धरना; सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल धरना स्थल पर रात बिताकर समर्थन में।

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Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026Sub Editor
August 29, 2025 • 3:14 PM  209
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बालोतरा अस्पताल में लापरवाही से युवक की मौत,सांसद उम्मेदाराम परिजनों और ग्रामीणों के साथ हॉस्पिटल के बाहर सोए
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बालोतरा अस्पताल में लापरवाही से युवक की मौत,सांसद उम्मेदाराम परिजनों और ग्रामीणों के साथ हॉस्पिटल के बाहर सोए

बालोतरा शहर के पचपदरा रोड पर स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान एक युवक की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल प्रशासन पर गलत इंजेक्शन लगाने का गंभीर आरोप लगाया है, जिसके बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल के बाहर धरना शुरू कर दिया। गुरुवार देर रात बाड़मेर-जैसलमेर के सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल भी धरना स्थल पर पहुंचे और रात वहीं बिताई। इस घटना ने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

जानकारी के अनुसार, अकदड़ा गांव निवासी मालाराम गोदारा को बाइक फिसलने के कारण चोट लगी थी। हाथ और पैर में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें बुधवार सुबह पचपदरा रोड स्थित सिटी लाइट अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद मालाराम के हाथ में फ्रैक्चर होने की बात कही और ऑपरेशन का सुझाव दिया। ऑपरेशन से पहले मरीज को एक इंजेक्शन लगाया गया, जिसके कुछ ही देर बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। हालत गंभीर होने पर अस्पताल प्रशासन ने उन्हें जोधपुर रेफर कर दिया, लेकिन जोधपुर पहुंचने से पहले ही रास्ते में मालाराम की मौत हो गई।

मृतक के रिश्तेदार ओमप्रकाश ने बताया कि जोधपुर के मेडिपल्स अस्पताल में डॉक्टरों ने पुष्टि की कि मालाराम की मौत 3-4 घंटे पहले ही हो चुकी थी। परिजनों का आरोप है कि निजी अस्पताल ने अपनी गलती छुपाने के लिए मृतक को जबरदस्ती जोधपुर रेफर किया। इससे नाराज परिजनों ने मालाराम के शव को बर्फ पर रखकर अस्पताल के काउंटर के पास प्रदर्शन शुरू कर दिया और मुख्य सड़क पर धरना शुरू कर दिया।

सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल का धरने में शामिल होना

गुरुवार रात करीब 9 बजे सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बातचीत की, लेकिन कोई सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद सांसद ने परिजनों और ग्रामीणों के साथ धरना स्थल पर ही रात गुजारी। सांसद ने इस घटना को "दुर्भाग्यपूर्ण और अमानवीय" करार देते हुए सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, "बालोतरा के सिटी लाइट अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही के कारण सिर्फ हाथ के फ्रैक्चर के मरीज मालाराम की मौत हो गई। अस्पताल ने अपनी गलती छुपाने के लिए मृतक को जोधपुर रेफर किया, जो बेहद निंदनीय है।"

सांसद ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए 29 और 30 अगस्त को अपने दिल्ली और बिहार के प्रस्तावित दौरे भी रद्द कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि वे पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने तक उनके साथ खड़े रहेंगे।

अस्पताल प्रशासन का क्या है कहना?

अस्पताल के डॉक्टर प्रकाश विश्नोई ने दावा किया कि ऑपरेशन सफल रहा था और मालाराम 3-4 घंटे तक स्वस्थ थे। उन्होंने बताया कि मरीज अस्पताल में घूम भी रहा था, लेकिन अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी, जिसके बाद उन्हें जोधपुर रेफर किया गया। हालांकि, परिजनों ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि गलत इंजेक्शन के कारण ही मालाराम की हालत बिगड़ी।

प्रशासन और स्थानीय नेताओं की भूमिका

धरने की सूचना मिलने पर डीएसपी सुशील मान और नाहटा अस्पताल के पीएमओ संदीप देवात मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाने की कोशिश की। लेकिन सहमति न बनने पर पूर्व विधायक मदन प्रजापत, छात्र नेता गिरधारीलाल, आरएलपी नेता थानसिंह डोली, प्रहलादराम धतरवाल, घंमडाराम धतरवाल, पूर्व प्रधान लक्ष्मणराम डेलू और जोगाराम डूडी जैसे स्थानीय नेता भी धरना स्थल पर पहुंचे और परिजनों का समर्थन किया।

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