जानलेवा हमले के तीन आरोपियों को 7-7 साल की सजा: प्रत्येक पर 50 हजार का जुर्माना, जांच में लापरवाही पर कोर्ट ने अजमेर रेंज से रिपोर्ट मांगी

अजमेर कोर्ट ने 2014 के तलवार हमले में तीन आरोपियों को 7-7 साल जेल और 50-50 हजार जुर्माना ठोका; अंगुली कटने की घटना में जांच लापरवाही पर अजमेर रेंज IG से रिपोर्ट तलब।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
November 8, 2025 • 2:55 PM  18
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जानलेवा हमले के तीन आरोपियों को 7-7 साल की सजा: प्रत्येक पर 50 हजार का जुर्माना, जांच में लापरवाही पर कोर्ट ने अजमेर रेंज से रिपोर्ट मांगी
“जानलेवा हमले के तीन आरोपियों को 7-7 साल की सजा: प्रत्येक पर 50 हजार का जुर्माना, जांच में लापरवाही पर कोर्ट ने अजमेर रेंज से रिपोर्ट मांगी”
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8 Nov 2025
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जानलेवा हमले के तीन आरोपियों को 7-7 साल की सजा: प्रत्येक पर 50 हजार का जुर्माना, जांच में लापरवाही पर कोर्ट ने अजमेर रेंज से रिपोर्ट मांगी

अजमेर, राजस्थान: अतिरिक्त सेशन न्यायाधीश (महिला उत्पीड़न प्रकरण) कोर्ट ने एक सनसनीखेज जानलेवा हमले के मामले में तीनों आरोपियों को सात-सात साल की कड़ी कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश राजेश मीणा ने दोष सिद्ध होने पर आरोपियों को दो-दो दोस्ती (fine) के रूप में 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यदि जुर्माना न चुकाने पर अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। कोर्ट ने मामले की जांच में पुलिस की कथित लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाते हुए अजमेर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। यह फैसला अजमेर की दरगाह थाना क्षेत्र में हुए एक क्रूर हमले के खिलाफ न्याय का प्रतीक है, जिसमें पीड़ित की अंगुली धारदार हथियार से कटकर जमीन पर गिर गई थी।

प्रकरण का पूरा विवरण: 2014 का खौफनाक हमला यह घटना 16 जून 2014 को अजमेर के हाजी सैयद बिलाल हुसैन चिश्ती के साथ हुई, जो खादिम मोहल्ला का निवासी हैं। पीड़ित ने दरगाह थाना पुलिस को दर्ज कराई शिकायत के अनुसार, वे अपने घर से निकलकर हवेली के पास मुख्य सड़क पर जा रहे थे। तभी पीछे से तीनों आरोपी उन पर टूट पड़े। मुख्य आरोपी सैयद तारीफ चिश्ती उर्फ तारीफ जमाली ने तलवार से पीड़ित पर वार किया, जिससे उनकी एक अंगुली कटकर नीचे गिर गई। अन्य दो आरोपियों—सैयद तोसिफ उर्फ चिंकी और फखर जमाली—ने भी धारदार हथियारों से हमला किया, जिसका मकसद पीड़ित की हत्या करना था।हमले के दौरान सड़क पर हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों ने किसी तरह पीड़ित को बचाया और उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकीय जांच में पुष्टि हुई कि हमला जानलेवा था, क्योंकि हथियारों के घाव गंभीर थे। पीड़ित हाजी सैयद बिलाल हुसैन चिश्ती, जो दरगाह शरीफ के खादिम हैं, ने बताया कि आरोपी उनके पुराने दुश्मनी के कारण इस वारदात को अंजाम देना चाहते थे। घटना के बाद दरगाह थाना पुलिस ने IPC की धारा 307 (हत्या का प्रयास) समेत अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।

अदालती कार्यवाही: लंबी कानूनी जंग का अंत मामला अतिरिक्त सेशन न्यायाधीश (महिला उत्पीड़न प्रकरण) कोर्ट में चला, जहां न्यायाधीश राजेश मीणा ने सुनवाई की। अभियोजन पक्ष ने मजबूत साक्ष्य पेश किए, जिसमें पीड़ित का बयान, चश्मदीद गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अपराध स्थल से बरामद हथियार शामिल थे। तलवार पर लगे खून के निशान फॉरेंसिक जांच में आरोपी से जुड़े पाए गए। बचाव पक्ष ने आरोपों से इनकार किया, लेकिन सबूतों के अभाव में उनकी दलीलें खारिज हो गईं।गत सप्ताह कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए तीनों—सैयद तोसिफ उर्फ चिंकी (खादिम मोहल्ला निवासी), सैयद तारीफ चिश्ती और फखर जमाली—को दोषी ठहराया। प्रत्येक को 7 वर्ष की सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये का जुर्माना सुनाया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जुर्माना न भरने पर अतिरिक्त जेल अवधि होगी, जो IPC के प्रावधानों के अनुरूप है। न्यायाधीश ने फैसले में कहा, "ऐसे क्रूर हमलों से समाज में भय का माहौल बनता है। आरोपी दोस्ती के रिश्ते में भी हिंसा के शिकार हुए, लेकिन कानून सबके लिए बराबर है।"

 सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कोर्ट ने मामले की प्रारंभिक जांच में दरगाह थाना पुलिस की लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया। न्यायाधीश राजेश मीणा ने नोट किया कि घटना के तुरंत बाद अपराध स्थल की सही तरीके से सीलिंग नहीं की गई, न ही महत्वपूर्ण साक्ष्य समय पर एकत्र किए गए। इससे मुकदमे में देरी हुई और आरोपी लंबे समय तक फरार रहे। कोर्ट ने अजमेर रेंज के IG से इसकी विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें जांच अधिकारी की भूमिका और विभागीय कार्रवाई का उल्लेख होना चाहिए। यह कदम पुलिस सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है, जो भविष्य में ऐसी लापरवाही को रोक सकता है।

 

Mohit Parihar

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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