बाड़मेर-बालोतरा जिला पुनर्गठन विवाद: सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने BJP पर साधा निशाना
राजस्थान सरकार ने 31 दिसंबर 2025 की आधी रात को बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में अचानक फेरबदल किया, जिसमें बायतु उपखंड को बालोतरा से हटाकर बाड़मेर में शामिल किया गया, जबकि गुड़ामालानी और धोरीमन्ना को बालोतरा में जोड़ा गया। बाड़मेर-जैसलमेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने इसे भाजपा का चुनावी लाभ के लिए किया गया "तुगलकी फरमान" करार दिया और आरोप लगाया कि पार्टी अपने हिसाब से वार्ड-जिला पुनर्गठन कर विरोधियों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस नेताओं ने इसे जनभावनाओं के खिलाफ बताया, जबकि स्थानीय स्तर पर विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। यह बदलाव 2027 जनगणना तक फ्रीज होने से पहले किया गया, जिससे करीब 2.5 लाख मतदाताओं और आने वाले चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
राजस्थान के पश्चिमी हिस्से में स्थित बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में हाल ही में किए गए अचानक बदलाव ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। राज्य सरकार (भाजपा शासित) ने 31 दिसंबर 2025 की आधी रात को राजस्व विभाग के माध्यम से एक अधिसूचना जारी कर दोनों जिलों के बीच क्षेत्रों का अदला-बदला कर दिया। यह बदलाव 1 जनवरी 2026 से प्रशासनिक सीमाओं को फ्रीज करने की समयसीमा से ठीक पहले किया गया, जिसके बाद 2027 की जनगणना तक कोई बदलाव संभव नहीं है।
पुनर्गठन के मुख्य बदलाव
बायतु उपखंड को बालोतरा से हटाकर दोबारा बाड़मेर जिले में शामिल किया गया।गुड़ामालानी और धोरीमन्ना उपखंडों को बाड़मेर से हटाकर बालोतरा जिले में जोड़ा गया।परिणामस्वरूप, अब बालोतरा जिले में 5 उपखंड, 9 तहसील और 5 उपतहसील हैं, जबकि बाड़मेर में 7 उपखंड, 11 तहसील और 7 उपतहसील हो गई हैं।इस बदलाव से करीब 2.5 लाख मतदाताओं पर असर पड़ा है और आने वाले विधानसभा परिसीमन तथा चुनावी समीकरण प्रभावित होने की आशंका है।