चूल्हे-चौके से 'पावरलिफ्टिंग' के मंच तक; बाड़मेर की अनीता राठी ने दुनिया में मनवाया अपनी शक्ति का लोहा
बाड़मेर की 44 वर्षीय अनीता अर्जुन राठी ने घरेलू जिम्मेदारियों और सामाजिक रूढ़ियों को तोड़कर पावरलिफ्टिंग में इतिहास रच दिया है। तीन बच्चों की माँ (डॉक्टर, इंजीनियर और MBA) अनीता ने अमेरिका में 65 देशों के बीच विश्व में चौथी रैंक हासिल की और अब तक 15 पदक जीत चुकी हैं। पति और कोच के सहयोग से बाड़मेर की पहली महिला नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट बनीं अनीता की कहानी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर नारी शक्ति की एक अनुपम मिसाल है।
"जब हौसला बना लिया ऊंची उड़ान का, फिर देखना फिजूल है कद आसमान का।" राजस्थान के बाड़मेर जिले की अनीता अर्जुन राठी ने इन पंक्तियों को हकीकत में बदल दिया है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में अनीता की कहानी उन करोड़ों महिलाओं के लिए एक मशाल है, जो घर की चारदीवारी और सामाजिक बंदिशों के बीच अपने सपनों को कहीं ओझल कर देती हैं। 44 वर्ष की उम्र में, जब समाज अक्सर महिलाओं को 'ठहराव' की सलाह देता है, तब अनीता ने 'पावरलिफ्टिंग' जैसे कठिन खेल को चुनकर अपनी शक्ति का लोहा पूरी दुनिया में मनवाया है।
कोच का मार्गदर्शन और पति का अटूट विश्वास
अनीता की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे उनके पति अर्जुन राठी एक मजबूत ढाल बनकर खड़े रहे। एक ऐसे समाज में जहाँ पुरुषों का समर्थन अक्सर सीमित होता है, अर्जुन राठी ने न केवल अनीता को प्रोत्साहित किया, बल्कि घर और खेल के बीच संतुलन बनाने में उनका पूरा साथ दिया। साथ ही, उनके कोच के तकनीकी प्रशिक्षण और निरंतर सपोर्ट ने अनीता की मेहनत को सही दिशा दी। कोच के विश्वास और पति के समर्पण ने ही अनीता को घरेलू मोर्चे और अंतरराष्ट्रीय रिंग—दोनों जगह 'चैंपियन' बनाया।