कॉलेज में तीन मजारों को लेकर विवाद गहराया, धरोहर बचाओ समिति ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

कॉलेज में तीन मजारों के कथित अवैध निर्माण को लेकर विवाद गहराया, धरोहर बचाओ समिति ने हनुमान चालीसा पाठ कर विरोध जताया और 18 जुलाई की जांच रिपोर्ट के आधार पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।

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Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor
July 15, 2025 • 6:33 PM  685
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कॉलेज में तीन मजारों को लेकर विवाद गहराया, धरोहर बचाओ समिति ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
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कॉलेज में तीन मजारों को लेकर विवाद गहराया, धरोहर बचाओ समिति ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

राजस्थान की राजधानी जयपुर के प्रतिष्ठित महारानी कॉलेज में तीन मजारों के कथित अवैध निर्माण को लेकर विवाद ने तूल पकड़ लिया है। मंगलवार को धरोहर बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले समिति के पदाधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने कॉलेज के बाहर सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया और कॉलेज प्रशासन की सद्बुद्धि की कामना की। इस दौरान समिति ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि 18 जुलाई को आने वाली जांच कमेटी की रिपोर्ट उनके पक्ष में नहीं आई, तो वे जयपुर की जनता और छात्राओं के साथ मिलकर उग्र आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

महारानी कॉलेज, जो राजस्थान यूनिवर्सिटी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, में पंप हाउस और पानी की टंकी के पास तीन मजारों के निर्माण की खबर ने शैक्षणिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। धरोहर बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष भारत शर्मा ने इसे 'लैंड जिहाद' करार देते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, "जब महारानी कॉलेज की स्थापना 1944 में हुई थी, तब यहां कोई मजार नहीं थी। अचानक शैक्षणिक भूमि पर तीन मजारों का निर्माण अवैध अतिक्रमण है और इसके पीछे गहरी साजिश है।" शर्मा ने यह भी सवाल उठाया कि जिस कॉलेज में पुरुषों की एंट्री पर सख्त पाबंदी है, वहां ये धार्मिक ढांचे कैसे और कब बन गए।

छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल

महारानी कॉलेज में प्रतिवर्ष 6,000 से अधिक छात्राएं पढ़ाई करती हैं, और चार गर्ल्स हॉस्टल में लगभग 500 छात्राएं निवास करती हैं। इस तरह के धार्मिक निर्माण ने कॉलेज की सांस्कृतिक संरचना और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं। शर्मा ने कहा, "यह मामला हमारी बेटियों की सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा है। ये मजारें धार्मिक आयोजनों का केंद्र बन सकती हैं, जिससे भीड़ बढ़ेगी और भविष्य में यह जमीन वक्फ संपत्ति के रूप में कब्जे की ओर बढ़ सकती है।"

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