अलवर पोक्सो कोर्ट का कड़ा फैसला: 12 साल की नाबालिग से एक साल तक दुष्कर्म करने वाले 50 साल के आरोपी को उम्रकैद

अलवर की पोक्सो कोर्ट-2 ने 12 साल से कम उम्र की मासूम बच्ची के साथ एक साल तक 10-15 बार दुष्कर्म करने वाले 50 वर्षीय आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने आरोपी पर 4 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया और 2 लाख रुपये पीड़िता को मुआवजे के रूप में देने की अनुशंसा की। न्यायाधीश ने कहा कि बच्ची की मासूमियत का फायदा उठाकर किया गया यह जघन्य अपराध जीवनभर का आघात देता है, इसलिए सजा में कोई नरमी नहीं बरती जा सकती।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
January 2, 2026 • 2:51 PM  16
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अलवर पोक्सो कोर्ट का कड़ा फैसला: 12 साल की नाबालिग से एक साल तक दुष्कर्म करने वाले 50 साल के आरोपी को उम्रकैद
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2 Jan 2026
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अलवर पोक्सो कोर्ट का कड़ा फैसला: 12 साल की नाबालिग से एक साल तक दुष्कर्म करने वाले 50 साल के आरोपी को उम्रकैद

राजस्थान के अलवर जिले में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से निपटने वाली पोक्सो कोर्ट संख्या-2 ने एक जघन्य मामले में सख्त सजा सुनाई है। कोर्ट ने 12 वर्ष से कम उम्र की एक मासूम बच्ची के साथ लगभग एक वर्ष तक बार-बार दुष्कर्म करने वाले 50 वर्षीय आरोपी को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही आरोपी पर 4 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। कोर्ट ने जुर्माने की राशि में से 2 लाख रुपये पीड़िता को मुआवजे के रूप में देने की अनुशंसा की है।यह फैसला पोक्सो कोर्ट-2 की न्यायाधीश शिल्पा समीर ने सुनाया। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि आरोपी ने खिलौनों से खेलने की उम्र में बच्ची की मासूमियत का घिनौना फायदा उठाया। ऐसे अपराध का असर न केवल तुरंत पड़ता है, बल्कि पीड़िता के पूरे जीवन, उसके मन और मस्तिष्क पर गहरा और स्थायी प्रभाव डालता है। इसलिए सजा में किसी तरह की नरमी बरतना उचित नहीं है।

मामले की पूरी कहानी पीड़िता के पिता ने 12 नवंबर 2024 को अलवर के अरावली विहार थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 50 वर्षीय आरोपी उनकी 12 साल से कम उम्र की बेटी को कोल्ड ड्रिंक, टॉफी और अन्य चीजें देने के बहाने बहला-फुसलाता था। आरोपी बच्ची को अपने घर या अन्य एकांत स्थानों पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म करता रहा। इसके बाद वह बच्ची को धमकाकर चुप रहने के लिए मजबूर करता और बार-बार बुलाता रहा।आरोप है कि करीब एक साल की अवधि में आरोपी ने बच्ची के साथ 10 से 15 बार दुष्कर्म किया। यह अपराध पोक्सो एक्ट (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्शुअल ऑफेंसेज एक्ट) के तहत गंभीर श्रेणी में आता है, जहां 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ दुष्कर्म पर न्यूनतम सजा आजीवन कारावास तक हो सकती है।

कोर्ट में क्या हुआ? मामले की सुनवाई शुक्रवार को पूरी हुई। सजा सुनाने के दौरान आरोपी के वकील ने कोर्ट से सजा में नरमी बरतने की गुजारिश की। लेकिन सरकारी वकील पंकज यादव ने इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए कोई रियायत नहीं दी जा सकती।न्यायाधीश शिल्पा समीर ने सरकारी पक्ष के तर्कों से सहमत होते हुए सख्त टिप्पणी की:"आरोपी ने खिलौनों से खेलने की उम्र की नाबालिग की मासूमियत का फायदा उठाकर जघन्य अपराध किया है।""इस अपराध का प्रभाव न केवल तात्कालिक है, बल्कि पीड़िता के पूरे जीवन पर पड़ेगा। उसके मन और मस्तिष्क पर गहरा आघात लगेगा।""ऐसे मामलों में नरमी बरतना समाज को गलत संदेश देगा और अपराधियों का हौसला बढ़ाएगा।"कोर्ट ने सबूतों, गवाहों की गवाही और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया और अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई।

ऐसे मामलों का महत्व यह फैसला बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों पर सख्ती का संदेश देता है। पोक्सो एक्ट 2012 में ऐसे अपराधों के लिए कठोर प्रावधान हैं, ताकि दोषियों को कड़ी सजा मिले और समाज में डर पैदा हो। अलवर कोर्ट का यह निर्णय पीड़िताओं को न्याय दिलाने और अपराधियों को चेतावनी देने की दिशा में एक मजबूत कदम है।

Mohit Parihar

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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