राजस्थान के 611 सरकारी स्कूल बिना भवन के, बगरू में बदहाली देखने गई टीम पर हमला

जयपुर के बगरू में एक गौशाला में चल रहे जर्जर सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने गई CJP टीम पर हमला हुआ है। इस घटना और हालिया सरकारी आंकड़ों ने राजस्थान की चरमराती शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है, जहां सैकड़ों स्कूल बिना भवन, शौचालय और पेयजल सुविधाओं के संचालित हो रहे हैं और इसे लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं।

yashaswani
yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor
August 22, 2026 • 10:37 AM  6
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राजस्थान के 611 सरकारी स्कूल बिना भवन के, बगरू में बदहाली देखने गई टीम पर हमला
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राजस्थान के 611 सरकारी स्कूल बिना भवन के, बगरू में बदहाली देखने गई टीम पर हमला

राजधानी जयपुर के पास बगरू में शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की टीम पर उस वक्त हमला कर दिया गया, जब वे एक सरकारी स्कूल की बदहाली का निरीक्षण करने जा रहे थे। पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रंका के नेतृत्व में यह टीम इस आरोप की जमीनी हकीकत जानने पहुंची थी कि एक सरकारी स्कूल को गौशाला (तबेले) से संचालित किया जा रहा है।

ज्ञात हो कि पिछले साल इस स्कूल के मुख्य भवन को जर्जर और असुरक्षित घोषित कर बंद कर दिया गया था। इसके बाद छात्रों को पास ही के एक अस्थायी बाड़े में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां कथित तौर पर भैंसें बांधी जाती हैं। इससे पहले 14 अगस्त को भी रंका ने अलवर के एक स्कूल का दौरा किया था, जहां एक खाली कमरे की छत ढहने के बाद छात्रों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया था।

सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे की जमीनी हकीकत

बगरू का यह स्कूल राज्य में बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा इकलौता स्कूल नहीं है। नेता प्रतिपक्ष (LoP) टीकाराम जूली के एक सवाल के जवाब में राज्य सरकार ने समग्र शिक्षा अभियान (UDISE 2025-26) के जो आंकड़े पेश किए हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं:

  • भवन विहीन स्कूल: पूरे राजस्थान में 611 स्कूल बिना बिल्डिंग के चल रहे हैं (जिनमें 10 बालिका विद्यालय हैं)। अकेले जयपुर में ऐसे 38 स्कूल हैं।

  • सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र (बिना भवन वाले): झालावाड़ जिले के अकलेरा (23), खानपुर (16) और झालरापाटन (11) की स्थिति सबसे खराब है। इसके अलावा फलोदी के बाप (11) और बांसवाड़ा के छोटी सरवन (10) भी शीर्ष पांच में शामिल हैं।

  • शौचालय का अभाव: राज्य के 64,484 भवनों वाले स्कूलों में से 2,047 स्कूलों में शौचालय नहीं है। आदिवासी बहुल जिले जैसे बांसवाड़ा (188), डूंगरपुर (124) और उदयपुर (98) इसमें सबसे निचले पायदान पर हैं।

  • पेयजल की किल्लत:1,049 स्कूलों में पीने के पानी की कोई सुविधा नहीं है। इसमें दौसा (96), उदयपुर (70) और अलवर (65) सबसे आगे हैं।

सरकार का बचाव और विपक्ष का प्रहार

इस मुद्दे पर राज्य सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली है, जहां दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे हैं।

सरकार का एक्शन प्लान:

  • सरकार का दावा है कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत स्कूलों में भवन और शौचालय उपलब्ध कराना शीर्ष प्राथमिकता है।

  • बजट घोषणा के अनुसार, स्कूलों की मरम्मत के लिए 550 करोड़ रुपये और नए भवनों के निर्माण के लिए 450 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

  • अगले पांच वर्षों में स्कूल भवनों के निर्माण और रखरखाव के लिए प्रति वर्ष 2,500 करोड़ रुपये (कुल 12,500 करोड़ रुपये) उपलब्ध कराए जाएंगे। यह फंड DMFT, समग्र शिक्षा, CSR और स्टेट फंड जैसे स्रोतों से जुटाया जा रहा है।

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का पलटवार:

  • जूली ने पिछले साल के ऑडिट का हवाला देते हुए कहा कि सरकार के पास कोई ठोस योजना नहीं है और वे फंड जुटाने में पूरी तरह विफल रहे हैं।

  • उन्होंने बताया कि राज्य में 3,768 सरकारी स्कूल और 83,783 कमरे पूरी तरह से जर्जर और इस्तेमाल के लिए असुरक्षित हैं।

  • स्कूलों को बंद करने या शिफ्ट करने से छात्रों का नामांकन तेजी से गिरा है, और स्कूलों की इस बदहाली को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट भी सरकार को कड़ी फटकार लगा चुका है।

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yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026Sub Editor

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