पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी संतोष राय की नजर मठ की करीब 700 बीघा जमीन और बैंक खातों में जमा 4 करोड़ रुपए से अधिक की राशि पर थी। आरोप है कि वह खुद को ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाकर पूरे मठ का नियंत्रण अपने हाथ में लेना चाहता था।
पुजारी नंदनवन के अनुसार, करीब छह महीने पहले संतोष राय ने मठ में आना-जाना शुरू किया। विकास कार्यों, गोशाला निर्माण और अन्य योजनाओं के नाम पर उसने ट्रस्ट सदस्यों का विश्वास जीता और धीरे-धीरे महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए।
पहले भरोसा जीता, फिर रची साजिश
नंदनवन का कहना है कि संतोष राय महंत देवानंद महाराज को ट्रस्ट से हटाकर स्वयं अध्यक्ष बनना चाहता था। इसी उद्देश्य से उसने अलग ट्रस्ट बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी। जब उसका प्रयास सफल नहीं हुआ तो कथित तौर पर साजिश का रास्ता अपनाया गया।
हत्या से पहले हुई रेकी
पुजारी ने दावा किया कि वारदात से चार दिन पहले संतोष राय एक युवक को लेकर मठ पहुंचा था। युवक को देखकर वह उसे लेकर बाहर चला गया और कहा कि नदी में मगरमच्छ दिखाने जा रहा है। अब उन्हें शक है कि वही युवक हत्या की रेकी करने आया था।
इसके अलावा करीब छह महीने पहले मठ में आयोजित एक बड़ी पार्टी को भी वे साजिश का हिस्सा मानते हैं। उस आयोजन में 200 से अधिक लोग शामिल हुए थे।
हत्या की रात क्या हुआ?
नंदनवन के मुताबिक, वारदात वाली रात उनके कमरे की कुंडी बाहर से बंद कर दी गई थी। देर रात जब उन्होंने बाहर निकलने की कोशिश की तो दरवाजा नहीं खुला। शक होने पर उन्होंने गांव के एक व्यक्ति को फोन किया।
जब दरवाजा खोला गया तो बाहर महंत देवानंद महाराज खून से लथपथ पड़े मिले। उनके शरीर पर चाकुओं के कई घाव थे। ग्रामीणों की मदद से उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
पहले शक के घेरे में थे पुजारी
घटनास्थल पर मौजूदगी और खून से सने कपड़ों के कारण शुरुआती जांच में पुलिस का शक पुजारी नंदनवन पर गया। उन्हें हिरासत में लेकर कई दिनों तक पूछताछ की गई, लेकिन जांच में उनकी संलिप्तता नहीं मिलने पर क्लीन चिट दे दी गई।
नंदनवन ने ही पुलिस को एक अहम सुराग दिया। उन्होंने बताया कि बंद कमरे के दरवाजे के छेद से उन्होंने एक युवक को देखा था। उनके बताए हुलिए के आधार पर पुलिस ने स्केच तैयार किया और जांच आरोपियों तक पहुंच गई।
आरोपी की शादी भी इसी मठ में हुई थी
मामले में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। हत्या के आरोपी आदित्य वर्मा और उसकी पत्नी जैक्शन जॉर्ज का विवाह संस्कार भी इसी चंद्रेसल मठ में हुआ था। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ समय बाद वही आदित्य महंत की हत्या की साजिश में शामिल पाया गया।
RTU कर्मचारियों ने भी लगाए आरोप
गिरफ्तारी के बाद राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (RTU) के कई कर्मचारी भी सामने आए हैं। उनका आरोप है कि संतोष राय आरटीआई और शिकायतों के जरिए कर्मचारियों को परेशान करता था। कई अधिकारियों और प्रोफेसरों ने उस पर झूठी शिकायतों के माध्यम से मानसिक और आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए हैं।
फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है। मठ की संपत्ति, ट्रस्ट विवाद और हत्या के बीच के संबंधों की कड़ियां जोड़कर पूरे षड्यंत्र का खुलासा करने की कोशिश की जा रही है।