इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, संसद में शुरू हुई हटाने की प्रक्रिया महाभियोग प्रस्ताव को लोकसभा स्पीकर की मंजूरी

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ कैश कांड में महाभियोग प्रस्ताव को मंजूरी दी, तीन सदस्यीय जांच समिति गठित।

Web Desk
Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor
August 12, 2025 • 12:54 PM  50
क्राइम
NEWS CARD
Logo
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, संसद में शुरू हुई हटाने की प्रक्रिया महाभियोग प्रस्ताव को लोकसभा स्पीकर की मंजूरी
“इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, संसद में शुरू हुई हटाने की प्रक्रिया महाभियोग प्रस्ताव को लोकसभा स्पीकर की मंजूरी”
Favicon
Read more on thekhatak.com
12 Aug 2025
https://thekhatak.com/severe-charges-of-corruption-against-allahabad-high-court-judge-impeachment-process-started-in-parliament-lok-sabha-speaker-approves-motion-for-impeachment
Google News
Copied
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, संसद में शुरू हुई हटाने की प्रक्रिया महाभियोग प्रस्ताव को लोकसभा स्पीकर की मंजूरी

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ कैश कांड मामले में बड़ा कदम उठाते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने मंगलवार को उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। इस प्रस्ताव को 146 सांसदों का समर्थन प्राप्त है, जिसमें केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और विपक्ष के नेता जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पीकर ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है, जो जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगे आरोपों की जांच करेगी।

क्या है कैश कांड मामला?

यह विवाद 14 मार्च 2025 की रात को शुरू हुआ, जब जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास में आग लगी। आग बुझाने के दौरान फायर ब्रिगेड और पुलिस को उनके स्टोररूम में भारी मात्रा में जले हुए नोट मिले। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह नकदी इतनी अधिक थी कि यह लगभग डेढ़ फीट ऊंची थी। उस समय जस्टिस वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट में जज थे और घटना के दौरान वह अपने आवास पर मौजूद नहीं थे।

इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। इस समिति में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जी.एस. संधावलिया और कर्नाटक हाईकोर्ट की जज अनु शिवरामन शामिल थीं। समिति ने अपनी जांच में पाया कि स्टोररूम, जहां जले हुए नोट मिले, पर जस्टिस वर्मा और उनके परिवार का नियंत्रण था। समिति ने इसे कदाचार का गंभीर मामला मानते हुए जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की सिफारिश की।

Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor

Web Desk The Khatak

Digital Archives

home Home amp_stories Web Stories local_fire_department Trending play_circle Videos mark_email_unread Newsletter