भारत की प्रगति पर जातिवाद की परछाईं आधुनिक दौर में भी क्यों नहीं टूटी बेड़ियां?

आधुनिक भारत तेजी से प्रगति कर रहा है, लेकिन जातिवाद आज भी समाज की गहरी जड़ों में मौजूद है। शिक्षा, तकनीक और शहरीकरण के बावजूद जाति के नाम पर भेदभाव, हिंसा और सामाजिक बहिष्कार की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। राजनीति में वोट बैंक, सामाजिक परंपराएं, आर्थिक असमानता और विवाह व्यवस्था जातिवाद को बनाए रखने के बड़े कारण हैं। यह कुरीति देश की एकता और समान विकास में बड़ी बाधा बनी हुई है।

Basanti Parmar
Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
January 5, 2026 • 11:21 AM  23
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भारत की प्रगति पर जातिवाद की परछाईं आधुनिक दौर में भी क्यों नहीं टूटी बेड़ियां?
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5 Jan 2026
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भारत की प्रगति पर जातिवाद की परछाईं आधुनिक दौर में भी क्यों नहीं टूटी बेड़ियां?

भारत आज वैश्विक मंच पर एक उभरती हुई शक्ति के रूप में पहचाना जाता है। अंतरिक्ष विज्ञान से लेकर डिजिटल क्रांति, स्टार्टअप संस्कृति से लेकर आर्थिक विकास तक—देश ने बीते दशकों में बड़ी छलांग लगाई है। लेकिन इसी तेज़ विकास के समानांतर एक कड़वी सच्चाई भी मौजूद है, जो समाज की नींव को लगातार कमजोर कर रही है—जातिवाद।

आधुनिकता के बावजूद पुरानी सोच क्यों कायम?

शिक्षा, शहरीकरण और तकनीक के विस्तार के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि जाति आधारित भेदभाव धीरे-धीरे खत्म होगा। मगर हकीकत इसके उलट है। जाति के नाम पर हिंसा, अपमान, सामाजिक बहिष्कार और संस्थागत भेदभाव की घटनाएं आज भी सामने आ रही हैं। यह केवल ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं, बल्कि शहरों, शिक्षण संस्थानों, दफ्तरों और यहां तक कि प्रशासनिक ढांचे में भी इसकी झलक मिलती है।

Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

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