चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी का बयान: युद्ध की अवधि तय नहीं, भारत को आत्मनिर्भर बनना होगा

चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि युद्ध की लंबाई पहले से तय नहीं की जा सकती, इसलिए भारत को रक्षा क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनना चाहिए। उन्होंने हथियारों के उत्पादन, मरम्मत और R&D पर जोर दिया। जयपुर में 78वीं आर्मी डे परेड के दौरान उन्होंने भैरव बटालियन जैसी नई इकाइयों की क्षमता पर चर्चा की, जो सेना की लड़ाकू क्षमता बढ़ाएंगी। रूस-यूक्रेन युद्ध से सबक लेते हुए टेक्नोलॉजी और नई रणनीतियों की जरूरत बताई।

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TEAM KHATAK Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026Editor
January 15, 2026 • 6:05 PM  9
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चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी का बयान: युद्ध की अवधि तय नहीं, भारत को आत्मनिर्भर बनना होगा
जयपुर:
चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने देश की सुरक्षा पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि युद्ध की लंबाई पहले से तय नहीं की जा सकती, इसलिए भारत को रक्षा क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनना चाहिए। जयपुर में 78वीं आर्मी डे परेड के दौरान आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने सेना की आधुनिकीकरण, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और नई यूनिट्स जैसे भैरव बटालियन पर चर्चा की।
युद्ध की अनिश्चितता और आत्मनिर्भरता की जरूरत
जनरल द्विवेदी ने कहा कि युद्ध चार दिन चलेगा या चार साल, यह पहले से कोई नहीं बता सकता। इसका अंदाजा युद्ध क्षेत्र में ही लगता है। ऐसे में अगर देश को लंबी लड़ाई लड़नी पड़े तो सेना के हथियार और अन्य सामान देश में ही बनने चाहिए। साथ ही, उनकी मरम्मत की क्षमता भी भारत के पास होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि तभी किसी भी हालात में मजबूती से मुकाबला किया जा सकता है।उन्होंने बताया कि अगर किसी इक्विपमेंट की कमी हो तो उसे पूरा करने के कई रास्ते होने चाहिए, जैसे विदेश से खरीदना, विदेशी टेक्नोलॉजी को भारत लाकर उत्पादन करना या विदेशी कंपनियों को भारत में मैन्युफैक्चरिंग के लिए आमंत्रित करना। इन चैनलों से आत्मनिर्भरता को मजबूत किया जा सकता है।
रिसर्च एंड डेवलपमेंट: आत्मनिर्भरता की कुंजी
आर्मी चीफ ने आत्मनिर्भरता की सबसे बड़ी कड़ी के रूप में R&D को बताया। उन्होंने कहा कि जब तक देश अनुसंधान पर गंभीरता से काम नहीं करेगा और सिर्फ टेक्नोलॉजी लाकर उसे बनाता रहेगा, तब तक लंबी लड़ाई लड़ने की क्षमता नहीं बनेगी। इसी सोच के तहत भारतीय सेना डीआरडीओ, एकेडमियां, इंडस्ट्री और पॉलिसी मेकर्स के साथ मिलकर काम कर रही है।उन्होंने iDEX की ‘अदिति’ स्कीम जैसी योजनाओं का जिक्र किया, जिनके जरिए R&D को बढ़ावा दिया जा रहा है। जब कोई नया इक्विपमेंट सेना की जरूरतों पर खरा उतरता है तो उसके ऑर्डर 4 से 6 गुना तक दिए जा सकते हैं। नई डिफेंस प्रोसीजर में इसे और बढ़ाने की तैयारी है।
भैरव बटालियन से बढ़ेगी सेना की लड़ाकू क्षमता
जनरल द्विवेदी ने भैरव बटालियन जैसी नई ऑर्गेनाइजेशंस की सराहना की, जो सेना की लड़ाई की एफिशिएंसी को कई गुना बढ़ा सकती हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि युद्ध की अवधि अनिश्चित होती है और टेक्नोलॉजी सैनिक की जगह नहीं लेती, बल्कि उसकी क्षमता बढ़ाती है।उन्होंने कहा कि आज की लड़ाइयों में छोटी टुकड़ियां ज्यादा प्रभावी हैं। नई यूनिट्स तेजी से बदलाव अपना लेती हैं। भैरव बटालियन सामान्य इन्फेंट्री और स्पेशल फोर्स के बीच के गैप को भरती है। परेड में इसकी क्षमता देखकर अगर ऐसी 25 बटालियन खड़ी की जाएं तो पारंपरिक इन्फेंट्री की जरूरत नहीं पड़ेगी।
जनरल ने परेड में दिव्यास्त्र और शक्ति बाण जैसी यूनिट्स की ताकत पर चर्चा की। उन्होंने आधुनिक ड्रोन की क्षमता बताई, जो 400 मीटर से 800 किलोमीटर तक स्ट्राइक कर सकते हैं। इसके लिए नए ऑर्गेनाइजेशन और सुपर स्पेशियलिटी ट्रेनिंग वाले जवानों की जरूरत है।उन्होंने कहा कि बदलाव आर्म्ड, मैकेनाइज्ड इन्फेंट्री और सिग्नल्स जैसी यूनिट्स में भी किए जाएंगे। तेजी से बदलते युद्ध क्षेत्र में टिके रहने के लिए उससे भी तेज तैयारियां जरूरी हैं।
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