जोधपुर में औषधीय पौधों पर वैश्विक शोध की नई शुरुआत: भारत-स्विट्जरलैंड साझेदारी से 'वन हेल्थ' को बढ़ावा
जोधपुर में पश्चिमी राजस्थान के औषधीय पौधों पर पहली बार संयुक्त शोध शुरू होने जा रहा है। कृषि विश्वविद्यालय, राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय और स्विट्जरलैंड की संस्था 'एपीएन' इस परियोजना में साझेदार हैं। स्विट्जरलैंड, मिस्र और युगांडा के प्रतिनिधियों ने जोधपुर में पांच दिन का दौरा किया, जिसमें शोध सुविधाओं का अवलोकन और 'वन हेल्थ' अवधारणा पर आधारित प्राकृतिक खेती पर चर्चा हुई। कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. अरुण कुमार ने बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें औषधीय पौधों की खेती और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया गया।
जोधपुर, राजस्थान: पश्चिमी राजस्थान के औषधीय पौधों पर पहली बार एक अभूतपूर्व संयुक्त शोध की शुरुआत होने जा रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में जोधपुर के कृषि विश्वविद्यालय और राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने स्विट्जरलैंड की संस्था 'एपीएन' (APN) के साथ मिलकर कदम उठाया है। इस शोध का उद्देश्य प्राकृतिक खेती और 'वन हेल्थ' की अवधारणा को बढ़ावा देना है, जो मानव, पशु और पर्यावरण के स्वास्थ्य को एक साथ जोड़ने पर केंद्रित है। इस परियोजना को गति देने के लिए स्विट्जरलैंड, मिस्र (इजिप्ट) और युगांडा से आए विदेशी प्रतिनिधियों ने जोधपुर में पांच दिवसीय दौरा किया, जिसमें दोनों विश्वविद्यालयों की सुविधाओं का अवलोकन और परियोजना से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
इस संयुक्त शोध का मुख्य लक्ष्य पश्चिमी राजस्थान की मरुस्थलीय जलवायु में पाए जाने वाले औषधीय पौधों की क्षमता को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना और उनके उपयोग को बढ़ावा देना है। यह परियोजना न केवल आयुर्वेदिक चिकित्सा को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी, बल्कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास में भी योगदान देगी। 'वन हेल्थ' अवधारणा के तहत यह शोध मानव स्वास्थ्य, पशु कल्याण और पर्यावरण संतुलन को एकीकृत करने का प्रयास करेगा।
विदेशी प्रतिनिधियों का दौरा