जानिए नरेश मीणा के जीवन के बारे,एक ही घर में है इतने नेता,कैसे हुई थी शुरुआत

नरेश मीणा, राजस्थान सियासत के बागी सितारे, ने थप्पड़ कांड से सुर्खियाँ बटोरीं और 11 जुलाई 2025 को जमानत मिलने के बाद समर्थकों में उत्साह जगा। छात्र नेता से निर्दलीय उम्मीदवार तक, उनकी जमीनी पकड़ और विवादास्पद छवि उन्हें एक आंदोलन का प्रतीक बनाती है।

Web Desk
Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor
July 11, 2025 • 1:45 PM  673
राजनीति
NEWS CARD
Logo
जानिए नरेश मीणा के जीवन के बारे,एक ही घर में है इतने नेता,कैसे हुई थी शुरुआत
“जानिए नरेश मीणा के जीवन के बारे,एक ही घर में है इतने नेता,कैसे हुई थी शुरुआत”
Favicon
Read more on thekhatak.com
11 Jul 2025
https://thekhatak.com/know-about-the-life-of-naresh-meena-so-many-leaders-in-the-same-house-how-it-started
Google News
Copied
जानिए नरेश मीणा के जीवन के बारे,एक ही घर में है इतने नेता,कैसे हुई थी शुरुआत

रेगिस्तान की तपती धूप में जब हवाएँ चलती हैं, तो धूल के गुबार में कई कहानियाँ उभरती हैं। राजस्थान की सियासत भी कुछ ऐसी ही है यहाँ हर कोने से एक नई कहानी, एक नया किरदार उभरता है, जो चर्चाओं के तूफान में अपनी जगह बनाता है। इस रेतीले प्रदेश की राजनीति का इतिहास गवाह है कि जो शख्स सुर्खियों में रहा, वह सियासत का सितारा बना। और इन्हीं सितारों में चमकता है एक नाम नरेश मीणा.....
यह वह शख्सियत है, जिसने एक थप्पड़ से न केवल राजस्थान की सियासत को हिलाया, बल्कि अपने बागी तेवर और करिश्माई व्यक्तित्व से लाखों दिलों में जगह बनाई। 13 नवंबर 2024 को देवली-उनियारा उपचुनाव के दौरान मालपुरा के एसडीएम अमित चौधरी को थप्पड़ मारने की घटना ने नरेश मीणा को रातोंरात राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया। यह एक ऐसा क्षण था, जिसने उन्हें जनता के नायक और सियासत के खलनायक, दोनों की छवि दी। आज यानि 11 जुलाई 2025 को  राजस्थान हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद उनके समर्थकों में उत्साह की लहर दौड़ पड़ी। सड़कों पर रैलियाँ, महापंचायतों का शोर, और सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरें नरेश मीणा अब केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक आंदोलन बन चुके हैं। उनकी जिंदगी और सियासी सफर की कहानी अनसुने और रोमांचक किस्सों से भरी है, जो उन्हें राजस्थान की सियासत का एक अनूठा किरदार बनाती है। आइए, इस बागी सितारे की कहानी को और करीब से जानें।

नरेश मीणा की कहानी जयपुर के राजस्थान विश्वविद्यालय के उन गलियारों से शुरू होती है, जहाँ सियासत की चिंगारी पहली बार भड़की। 1990 के दशक के आखिरी सालों में, जब वह विश्वविद्यालय में छात्र नेता के रूप में उभरे, तो उनकी बेबाकी और जोश ने उन्हें भीड़ से अलग कर दिया। बतौर महासचिव,उन्होंने कई छात्र आंदोलनों का नेतृत्व किया चाहे वह फीस वृद्धि के खिलाफ प्रदर्शन हो या छात्रों के हक की लड़ाई। नरेश की आवाज में वह आग थी, जो सत्ता के गलियारों को चुनौती देती थी। यहीं से उन्होंने सियासत की उस कला को सीखा, जो उन्हें बाद में एक बागी नेता के रूप में स्थापित करेगी।विश्वविद्यालय की सियासत ने नरेश को न केवल नेतृत्व का अनुभव दिया, बल्कि युवाओं के बीच उनकी पकड़ को भी मजबूत किया। उनकी तेज-तर्रार शैली और बिना डरे अपनी बात रखने का अंदाज उन्हें छात्रों का चहेता बना गया। यह वह दौर था, जब नरेश ने समझ लिया कि सियासत में बने रहने के लिए केवल वोट नहीं, बल्कि जनता का भरोसा और उसका जोश चाहिए।

नरेश मीणा का जन्म बारां जिले के नयागांव में हुआ, जहाँ उनका परिवार स्थानीय सियासत में गहरी जड़ें रखता है। उनके पिता, कल्याण सिंह मीणा, 30 साल तक सरपंच रहे, जिसने ग्रामीण स्तर पर उनकी लोकप्रियता को एक मजबूत आधार दिया। उनकी माँ वर्तमान में सरपंच हैं, पत्नी सुनीता बारां में जिला परिषद सदस्य हैं, और छोटे भाई की पत्नी पंचायत समिति की सदस्य हैं। यह सियासी परिवार नरेश के लिए एक मजबूत ढाल रहा, लेकिन उनकी बागी छवि ने उन्हें इस विरासत से कहीं आगे ले जाया।नरेश का निजी जीवन भी उनकी सियासी छवि की तरह रोचक है। वह पेशे से पेट्रोल पंप संचालक हैं और हिंदुस्तान पेट्रोलियम से एक पंप लीज पर लिया हुआ है। उनकी संपत्ति 79 लाख रुपये की है, लेकिन 67 लाख रुपये से अधिक का कर्ज भी है, जो उनकी सामान्य पृष्ठभूमि को दर्शाता है। यह सादगी और जमीनी जुड़ाव ही उन्हें जनता के करीब लाता है।

Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor

Web Desk The Khatak

Digital Archives

home Home amp_stories Web Stories local_fire_department Trending play_circle Videos mark_email_unread Newsletter