300 साल पुरानी मिठास जो आज बन गई है ग्लोबल स्वीट ब्रांड

300 साल पुरानी विरासत, देशी घी की सुगंध और रबड़ी की लज़ीज़ परतों से सजी यह मिठाई अब भारत ही नहीं, अमेरिका, यूके और ऑस्ट्रेलिया तक पहुँच रही है। जानिए कैसे घेवर जयपुर की गलियों से उठकर वैश्विक मिठास का प्रतीक बना

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Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor
July 27, 2025 • 2:18 PM  294
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27 Jul 2025
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300 साल पुरानी मिठास जो आज बन गई है ग्लोबल स्वीट ब्रांड

जयपुर का घेवर, जिसे कभी तीज के त्योहार की पारंपरिक मिठाई माना जाता था, आज एक वैश्विक पहचान बन चुका है। इसकी मिठास अब न केवल भारत के घर-घर में, बल्कि सात समंदर पार विदेशों तक पहुंच रही है। देशी घी की सुगंध और रबड़ी की मलाईदार परतों से सजा यह मिष्ठान्न अब शादी-ब्याह, पारिवारिक समारोहों और यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय मेन्यू का हिस्सा बन गया है। आइए, जानते हैं घेवर की इस मधुर यात्रा और इसके इतिहास की कहानी, जो जयपुर की गलियों से शुरू होकर विश्व पटल तक पहुंची है।

300 साल पुरानी परंपरा

घेवर की कहानी कोई नई नहीं है। करीब 300 साल पहले, वर्ष 1750 में सवाई जयसिंह के समय लिखी गई एक पुस्तक में इसका जिक्र मिलता है। उस दौर में यह मिठाई जयपुर के राजघरानों और ब्रिटिश अधिकारियों के लिए खास तौर पर तैयार की जाती थी। तब से लेकर आज तक, घेवर जयपुर की संस्कृति और स्वाद का प्रतीक बना हुआ है। इसकी खासियत इसकी बनावट में है—मैदा, घी और चीनी की चाशनी से तैयार यह मिठाई इतनी हल्की और कुरकुरी होती है कि मुंह में रखते ही घुल जाती है। रबड़ी या मलाई की परत इसे और भी लज़ीज़ बनाती है।

तीज से सालभर की मिठास

पहले घेवर का नाम सुनते ही तीज का ख्याल आता था, लेकिन अब यह मिठाई सालभर लोगों की पसंद बन चुकी है। शादी-पार्टियों से लेकर कॉरपोरेट आयोजनों तक, घेवर हर मौके पर छा रहा है। खास तौर पर रबड़ी वाला घेवर, जिसकी मांग में तेजी से इजाफा हुआ है, लोगों के दिलों पर राज कर रहा है। जयपुर के मिठाई विक्रेता बताते हैं कि त्योहारों के समय तो घेवर की मांग इतनी बढ़ जाती है कि अतिरिक्त कारीगरों को काम पर लगाना पड़ता है।

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