“हम दो हमारा एक” पर क्यों उठे सवाल… आखिर क्या है पूरा मामला? एक बयान ने छेड़ दी ऐसी बहस, जिसने समाज और भविष्य दोनों को लेकर खड़े कर दिए बड़े सवाल!

अजमेर से आई एक ऐसी आवाज़ जिसने जनसंख्या और समाज को लेकर नई बहस छेड़ दी है… बालमुकुंद आचार्य के बयान में एक ऐसा शब्द और एक ऐसी चेतावनी छिपी है, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

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TEAM KHATAK Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Editor
April 10, 2026 • 11:42 AM  13
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“हम दो हमारा एक” पर क्यों उठे सवाल… आखिर क्या है पूरा मामला? एक बयान ने छेड़ दी ऐसी बहस, जिसने समाज और भविष्य दोनों को लेकर खड़े कर दिए बड़े सवाल!
““हम दो हमारा एक” पर क्यों उठे सवाल… आखिर क्या है पूरा मामला? एक बयान ने छेड़ दी ऐसी बहस, जिसने समाज और भविष्य दोनों को लेकर खड़े कर दिए बड़े सवाल!”
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10 Apr 2026
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“हम दो हमारा एक” पर क्यों उठे सवाल… आखिर क्या है पूरा मामला? एक बयान ने छेड़ दी ऐसी बहस, जिसने समाज और भविष्य दोनों को लेकर खड़े कर दिए बड़े सवाल!

“हम दो हमारा एक” या आने वाला संकट? अजमेर से उठी बड़ी चेतावनी

अजमेर के दक्षिणमुखी बालाजी हनुमान धाम में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में जब बालमुकुंद आचार्य मंच पर आए, तो उनका संबोधन सिर्फ धार्मिक नहीं रहा—वह सामाजिक चेतावनी में बदल गया।

उन्होंने सीधे तौर पर ‘हम दो हमारा एक’ की सोच को भविष्य के लिए खतरनाक बताते हुए कहा कि अगर समाज इसी मानसिकता में रहा, तो “वह दिन दूर नहीं जब हम अपने ही देश में अल्पसंख्यक हो जाएंगे।”

अपने बयान में ‘चच्चा’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने जनसंख्या असंतुलन की ओर इशारा किया—और यही शब्द अब इस पूरे बयान का सबसे चर्चित हिस्सा बन गया है।

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