"मालेगांव ब्लास्ट केस: सनातन आतंकवाद की बहस और बरी हुए सातों आरोपी – क्या है पूरा सच?"

मालेगांव ब्लास्ट केस (2008) में विशेष एनआईए कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित सहित सातों आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। इस फैसले ने "हिंदू आतंकवाद" की बहस को फिर से छेड़ दिया। कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने इसे "सनातन आतंकवाद" कहकर नया विवाद खड़ा किया, साथ ही बीजेपी सरकार पर जांच में देरी और कमजोरी का आरोप लगाया। कोर्ट ने दो वॉन्टेड आरोपियों की नए सिरे से जांच का आदेश दिया। पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा देने का निर्देश भी दिया गया।

Basanti Parmar
Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
August 1, 2025 • 2:02 PM  18
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"मालेगांव ब्लास्ट केस: सनातन आतंकवाद की बहस और बरी हुए सातों आरोपी – क्या है पूरा सच?"

महाराष्ट्र के मालेगांव में 29 सितंबर 2008 को हुए बम धमाके, जिसमें 6 लोगों की जान गई और 100 से अधिक लोग घायल हुए, ने न केवल देश को हिलाकर रख दिया, बल्कि भारतीय राजनीति और समाज में एक नई बहस को जन्म दिया। 17 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, 31 जुलाई 2025 को मुंबई की विशेष एनआईए कोर्ट ने इस मामले में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित सहित सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रहा। इस फैसले ने जहां एक ओर "हिंदू आतंकवाद" के नैरेटिव को लेकर सवाल उठाए, वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने इसे "सनातन आतंकवाद" कहकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया।

पृथ्वीराज चव्हाण का बयान: भगवा नहीं, सनातन आतंकवाद

पृथ्वीराज चव्हाण ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि "भगवा" शब्द का इस्तेमाल आतंकवाद से जोड़ना गलत है, क्योंकि यह छत्रपति शिवाजी महाराज और स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक है। उन्होंने सुझाव दिया कि इसके बजाय "हिंदू आतंकवाद" या "सनातन आतंकवाद" शब्द का उपयोग किया जाना चाहिए। चव्हाण ने केंद्र और महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि अगर सभी आरोपी निर्दोष थे, तो 2014 में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद इस मामले को क्यों नहीं बंद किया गया? उन्होंने कहा, "11 साल तक सरकार ने मुकदमा लड़ा, और अब कोर्ट में जाकर कह दिया कि कोई सबूत नहीं है। अगर पहले से पता था कि आरोपी बेकसूर हैं, तो देवेंद्र फडणवीस ने केस वापस क्यों नहीं लिया?"चव्हाण ने यह भी कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन इस मामले में पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिला। उन्होंने पूछा, "जो लोग इस धमाके में मारे गए, उनके परिवारों को सरकार क्या जवाब देगी?"

Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

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