रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा: रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार, मजबूत साझेदारी को नई ऊंचाई देने का मौका
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर 2025 को यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार भारत आएंगे। 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करेंगे। रूसी तेल की लॉन्ग-टर्म डील, S-400 की शेष डिलीवरी और ईएईयू के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर अहम बातचीत होगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्टेट डिनर की मेजबानी करेंगी।
नई दिल्ली/मॉस्को: रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण 2022 से ठप पड़ी द्विपक्षीय यात्राओं को फिर से गति मिलने वाली है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर 2025 को भारत का दौरा करेंगे। यह उनके तीन साल के लंबे अंतराल के बाद भारत की धरती पर पहली यात्रा होगी। इस दौरान दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और आर्थिक साझेदारी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा होने की उम्मीद है। खास तौर पर, रूसी क्रूड ऑयल की खरीद, एस-400 मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी और मुक्त व्यापार समझौते (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) पर बातचीत का केंद्र बिंदु रहेगा। यह यात्रा भारत-रूस संबंधों को युद्ध की छाया से उबारने और वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच मजबूत बनाने का एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
यात्रा का पृष्ठभूमि और महत्व रूस के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंधों को देखते हुए यह यात्रा बेहद अहम है। सोवियत संघ के समय से चली आ रही यह साझेदारी आज भी रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में मजबूत बनी हुई है। हालांकि, फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद पुतिन की कोई विदेश यात्रा नहीं हुई थी, खासकर भारत जैसे प्रमुख साझेदार देशों में। पिछले तीन वर्षों में दोनों देशों के नेता वर्चुअल माध्यमों से संपर्क में रहे, लेकिन आमने-सामने की मुलाकात का अभाव महसूस हो रहा था।विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह यात्रा भारत की ओर से प्रस्तावित थी, जो रूस के साथ ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में बढ़ती निर्भरता को ध्यान में रखते हुए की गई। यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है, और भारत ने रूसी तेल को सस्ते दामों पर खरीदकर अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर रखा है। 2024-25 में भारत रूस से लगभग 40% क्रूड ऑयल आयात करने वाला सबसे बड़ा खरीदार बन चुका है। इसी क्रम में यह यात्रा दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगी।
23वीं भारत-रूस शिखर सम्मेलन: मुख्य आकर्षण पुतिन का यह दौरा 23वीं भारत-रूस द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन (India-Russia Annual Summit) के इर्द-गिर्द घूमेगा। यह सम्मेलन दोनों देशों के बीच सालाना आयोजित होने वाली उच्च स्तरीय बैठक है, जिसमें राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा और सांस्कृतिक मुद्दों पर विचार-विमर्श होता है। परंपरागत रूप से, मेजबान देश बदल-बदलकर होता है—एक साल भारत, अगला रूस। 2022 के बाद यह पहली बार है जब सम्मेलन आमने-सामने हो रहा है।सम्मेलन के दौरान पुतिन का स्वागत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। दोनों नेताओं के बीच एक-से-एक द्विपक्षीय बैठक होगी, जिसमें वैश्विक शांति, बहुपक्षीयता और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा संभव है। सम्मेलन का थीम 'विश्वास, प्रतिबद्धता और एकजुटता' रखा गया है, जो वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में दोनों देशों की रणनीति को दर्शाता है।