राजस्थान के 50 से अधिक स्कूलों को झटका, प्री-प्राइमरी में भी RTE लागू .
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने फैसला दिया है कि जिन निजी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं संचालित हैं, वहां राइट टू एजुकेशन (RTE) के तहत प्रवेश स्तर पर 25% सीटें वंचित और कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए अनिवार्य होंगी। कोर्ट ने स्कूलों की यह दलील खारिज कर दी कि आरटीई केवल कक्षा पहली से लागू होता है। इस निर्णय से प्रदेश के 50 से अधिक स्कूल प्रभावित होंगे।
जोधपुर :- राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने राइट टू एजुकेशन (RTE) को लेकर एक महत्वपूर्ण और दूरगामी असर वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन निजी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं संचालित हो रही हैं, वहां भी प्रवेश स्तर पर आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को 25 प्रतिशत सीटों पर अनिवार्य रूप से दाखिला देना होगा। इस फैसले से प्रदेश के 50 से अधिक स्कूल सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।
क्या है हाईकोर्ट का फैसला
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि कोई स्कूल प्री-प्राइमरी शिक्षा (पीपी-1, पीपी-2, पीपी-3) चला रहा है, तो वही उसकी एंट्री लेवल क्लास मानी जाएगी। ऐसे में आरटीई अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार इन कक्षाओं में भी 25% आरक्षण लागू होगा। स्कूल प्रबंधन यह तर्क नहीं दे सकते कि आरटीई केवल कक्षा पहली से लागू होता है।