राजस्थान में फिर बस हादसा! हाईटेंशन लाइन की चपेट में आई मजदूरों से भरी बस 2 की मौत, 12 की हालत गंभीर.

राजस्थान के मनोहरपुर में मजदूरों की बस हाईटेंशन तारों से टकराई – करंट दौड़ा, आग भड़की! 2 मजदूर जिंदा जले, 12 बुरी तरह झुलसे, 5 जयपुर रेफर। बस ऊंची, लाइन नीची – लापरवाही की आग में फिर जल उठे गरीब मजदूर!

Basanti Parmar
Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
October 28, 2025 • 11:53 AM  32
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राजस्थान में फिर बस हादसा! हाईटेंशन लाइन की चपेट में आई मजदूरों से भरी बस  2 की मौत, 12 की हालत गंभीर.
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28 Oct 2025
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राजस्थान में फिर बस हादसा! हाईटेंशन लाइन की चपेट में आई मजदूरों से भरी बस  2 की मौत, 12 की हालत गंभीर.

जयपुर, 28 अक्टूबर 2025: राजस्थान एक बार फिर सड़क हादसों के काले अध्याय में एक नया पन्ना जोड़ चुका है। जयपुर जिले के मनोहरपुर इलाके में मंगलवार सुबह एक ऐसी घटना घटी, जो न केवल दिल दहला देने वाली है, बल्कि राज्य सरकार की सुरक्षा मानकों पर सवाल भी खड़े कर रही है। मजदूरों से खचाखच भरी एक निजी बस हाईटेंशन बिजली लाइन के तारों को छू गई, जिससे पूरे वाहन में करंट दौड़ गया और आग लग गई। इस भयानक हादसे में दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 12 अन्य बुरी तरह झुलस गए। गंभीर रूप से घायल पांच लोगों को जयपुर के बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। यह घटना राज्य में बसों से जुड़े हादसों की बढ़ती संख्या को देखते हुए चिंताजनक संकेत दे रही है.

हादसे का पूरा विवरण: सुबह की शांति में मौत का तांडव

घटना जयपुर ग्रामीण के मनोहरपुर थाना क्षेत्र के टोडी रोड पर सुबह करीब 8 बजे हुई। टोडी स्थित एक ईंट भट्ठे पर काम करने वाले प्रवासी मजदूरों को लेकर बस आ रही थी। ये मजदूर मुख्य रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से आए हुए थे, जो राजस्थान के ईंट भट्ठों पर दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बस की ऊंचाई हाईटेंशन लाइन से अधिक होने के कारण वाहन के ऊपरी हिस्से ने तारों को छुआ। इससे 11 केवी की हाई वोल्टेज लाइन का करंट बस के धातु बॉडी में फैल गया, जो चालक केबिन से लेकर पिछली सीट तक पहुंच गया।बस में सवार करीब 14-15 मजदूरों में अचानक अफरा-तफरी मच गई। चालक ने इमरजेंसी ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन करंट के झटके से वह खुद भी बेहोश हो गया। आग की लपटें फैलते ही मजदूर दरवाजे-खिड़कियों की ओर भागे, लेकिन कई फंस गए। स्थानीय ग्रामीणों ने हादसे की सूचना मिलते ही दौड़ लगाई और आग बुझाने के लिए बाल्टियां और मिट्टी का सहारा लिया। मनोहरपुर थाना पुलिस की टीम भी तुरंत मौके पर पहुंची और घायलों को निकालने का कार्य शुरू किया।पहले निकटवर्ती शाहपुरा उपजिला अस्पताल ले जाए गए घायलों में से दो को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन वे सभी 25-40 वर्ष के युवा मजदूर बताए जा रहे हैं। शेष 12 घायलों में से सात की हालत स्थानीय अस्पताल में स्थिर है, लेकिन पांच गंभीर रूप से झुलसे मजदूरों—जिनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं—को जयपुर के एसएमएस अस्पताल और बर्न यूनिट में भेजा गया। यहां उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट और एंटी-बर्न थेरेपी दी जा रही है। एक मरीज की हालत इतनी नाजुक है कि वेंटिलेटर पर रखा गया है।

पुलिस कार्रवाई और प्रारंभिक जांच: लापरवाही के आरोपों का बोलबाला.

पुलिस ने बस चालक के खिलाफ आईपीसी की धारा 304ए (लापरवाही से मौत) और मोटर व्हीकल एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, बस की ऊंचाई मापदंडों का पालन नहीं किया गया था—यह एक पुरानी मॉडल की निजी बस थी, जिसकी छत पर अतिरिक्त सामान लादा गया था। ईंट भट्ठा मालिकों पर भी गंभीर आरोप लगे हैं कि वे मजदूरों को ले जाने के लिए असुरक्षित वाहनों का इस्तेमाल करते हैं, बिना फिटनेस सर्टिफिकेट या इंश्योरेंस चेक किए।बिजली विभाग की टीम ने हादसे के बाद तुरंत लाइन को डिस्कनेक्ट कर दिया और इलाके का सर्वे शुरू कर दिया। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह लाइन 20 वर्ष पुरानी है और कई जगहों पर कम ऊंचाई पर गुजर रही है, जो आवासीय इलाकों के पास खतरा पैदा कर रही है। मनोहरपुर क्षेत्र में ही पिछले दो वर्षों में दो छोटे हादसे हो चुके हैं, जहां वाहन हाईटेंशन तारों से टकराए थे।

राजस्थान में बस हादसों का सिलसिला: क्या सबक नहीं ले रहा राज्य?

यह हादसा राजस्थान के लिए एक और झटका है, जहां बसों से जुड़े हादसे लगातार बढ़ रहे हैं। हाल के महीनों में राज्य में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या 15 प्रतिशत ऊपर चढ़ गई है। जयपुर के ही अजमेर हाईवे पर पिछले हफ्ते गैस टैंकर ब्लास्ट में 14 लोगों की मौत हुई, जिसमें एक स्लीपर बस भी आग की चपेट में आ गई। इससे पहले, भरतपुर-सांचौर रूट पर डिवाइडर से टकराई बस में एक की मौत और 18 घायल हुए। जालौर में 2021 का पुराना हादसा याद आ जाता है, जहां हाईटेंशन लाइन की चपेट में आई बस में 6 लोग जिंदा जल गए थे।2025 में ही राजस्थान में दर्जनभर बड़े बस हादसे हो चुके हैं—सुजानगढ़ में ओवरटेकिंग के दौरान 20 मौतें, कोटा में ब्रिज गिरने से 8 हताहत। ये आंकड़े बताते हैं कि राज्य में बसों की सुरक्षा पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। ईंट भट्ठों पर काम करने वाले प्रवासी मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि निजी बसें अक्सर ओवरलोडेड और बिना रखरखाव के चलाई जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हाईटेंशन लाइनों को ऊंचा करने और बसों के हाइट सेंसर अनिवार्य करने की जरूरत है। लेकिन अफसरशाही के चक्कर में ये सिफारिशें कागजों तक सीमित रह जाती हैं।मजदूर संगठनों ने सरकार से मृतकों के परिवार को 10 लाख रुपये मुआवजा, घायलों को नौकरी और इलाके में सुरक्षा उपायों की मांग की है। मुख्यमंत्री कार्यालय से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया, लेकिन विपक्ष ने इसे "सुरक्षा की लापरवाही" करार दिया है। यह सवाल उठना लाजमी है—क्या राजस्थान बस हादसों को रोकने के लिए गंभीर है, या ये घटनाएं अब "रूटीन" बन चुकी हैं? मजदूरों की जिंदगियां दांव पर लगी हैं, और समय आ गया है कि दावों से आगे बढ़कर कार्रवाई हो।

 

Basanti Parmar

Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

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