सरकारी स्कूलों में 'नो एंट्री' और वीडियोग्राफी बैन का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, क्या अपनी नाकामी छिपा रही हैं यूपी-राजस्थान सरकारें?
उत्तर प्रदेश और राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और वीडियोग्राफी पर लगे बैन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर। जानिए याचिकाकर्ता ने क्या उठाए गंभीर सवाल।
उत्तर प्रदेश और राजस्थान की राज्य सरकारों द्वारा सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और वीडियोग्राफी पर लगाई गई रोक का विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस तुगलकी फरमान के खिलाफ अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा ने शीर्ष अदालत में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है, जिसमें इन विवादित सर्कुलर को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की गई है।
क्या है सरकारों का विवादित आदेश?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दोनों राज्यों के शिक्षा विभागों द्वारा जारी किए गए सर्कुलर में स्कूल परिसर को बाहरी लोगों के लिए पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस आदेश के तहत बिना पूर्व अनुमति के कोई भी पत्रकार, यूट्यूबर, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर या नागरिक समाज का प्रतिनिधि स्कूल में प्रवेश नहीं कर सकता। इसके अलावा, स्कूल के अंदर किसी भी तरह की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, ऑडियो रिकॉर्डिंग, लाइव-स्ट्रीमिंग या शिक्षकों/छात्रों का इंटरव्यू लेने पर भी सख्त पाबंदी लगा दी गई है।