क्या बिना पिता की मर्जी के विदेश जा सकता है बच्चा? जानिए पासपोर्ट नियमों पर राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला

राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि तलाकशुदा माता-पिता के आपसी विवाद के कारण किसी नाबालिग बच्चे का पासपोर्ट या विदेश में पढ़ाई का अधिकार नहीं रोका जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चे माता-पिता की संपत्ति नहीं हैं, इसलिए पिता की सहमति या हस्ताक्षर के बिना भी नियमों के तहत (ऐनेक्सर सी) शपथ पत्र लेकर नाबालिग का पासपोर्ट जारी किया जा सकता है।

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yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026 Sub Editor
August 22, 2026 • 1:24 PM  105
राजस्थान
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क्या बिना पिता की मर्जी के विदेश जा सकता है बच्चा? जानिए पासपोर्ट नियमों पर राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला
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क्या बिना पिता की मर्जी के विदेश जा सकता है बच्चा? जानिए पासपोर्ट नियमों पर राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला

राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में तलाकशुदा दंपतियों और उनके बच्चों के अधिकारों को लेकर एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि माता-पिता के बीच चल रहे विवाद के कारण किसी भी नाबालिग बच्चे को विदेश में पढ़ाई करने से नहीं रोका जा सकता। कोर्ट के अनुसार, पासपोर्ट बनाने के लिए हर स्थिति में पिता के हस्ताक्षर या सहमति अनिवार्य नहीं है।

पूरा मामला क्या है?

यह मामला एक 17 वर्षीय छात्र का है, जिसने 10वीं कक्षा में बेहतरीन अंक हासिल किए और आगे की पढ़ाई के लिए उसका चयन विदेश के एक संस्थान में हुआ।

इन परिस्थितियों को देखते हुए, छात्र ने अपनी मां के माध्यम से पासपोर्ट जारी करवाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणियां

जस्टिस अनूप कुमार ढंढ की बेंच ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए पासपोर्ट प्राधिकरण को तुरंत पासपोर्ट जारी करने के निर्देश दिए। फैसले के दौरान कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण बातें कहीं:

"बच्चे माता-पिता की संपत्ति नहीं हैं, बल्कि कानून की नजर में वे एक स्वतंत्र व्यक्ति हैं। माता-पिता केवल उनके अभिभावक (Custodian) हैं, मालिक नहीं।"

  • तकनीकी आधार पर रोक अनुचित: कोर्ट ने माना कि जब पिता ने बच्चे से मिलने या कस्टडी के लिए कोई कदम ही नहीं उठाया, तो बच्चे को पिता की सहमति लाने के लिए मजबूर करना बिल्कुल गलत है।

  • अनुच्छेद 21 का हवाला: अदालत ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार) के तहत 'विदेश यात्रा का अधिकार' भी शामिल है।

  • निष्पक्ष प्रक्रिया: कोर्ट ने कहा कि इस मौलिक अधिकार से किसी भी व्यक्ति को केवल कानूनी और निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत ही रोका जा सकता है, महज़ तकनीकी कमियों के आधार पर नहीं।

पासपोर्ट नियमों में राहत का प्रावधान

अदालत ने फैसले में यह भी साफ किया कि पासपोर्ट प्राधिकरण हर मामले में दोनों माता-पिता की सहमति के लिए जिद नहीं कर सकता। यदि तलाक या किसी अन्य विवाद के कारण एक अभिभावक, दूसरे अभिभावक की सहमति प्राप्त करने में असमर्थ है, तो पासपोर्ट नियमों के ऐनेक्सर सी (Annexure C) के तहत एक शपथ पत्र देकर भी नाबालिग का पासपोर्ट बनवाया जा सकता है।

क्या आप इस फैसले से जुड़े किसी खास कानूनी नियम या पासपोर्ट बनवाने के लिए 'ऐनेक्सर सी' की प्रक्रिया के बारे में और अधिक जानकारी चाहते हैं?

yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026 Sub Editor

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