जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 के आखिरी दिन में Gen-Z की 'क्रांति' पर गहन चर्चा: क्या वे वाकई बदलाव ला सकते हैं?
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 के आखिरी दिन चारबाग स्टेज पर 'Gen-Z, Millennials और Mummyji' सेशन में संतोष देसाई, रिया चोपड़ा और अनुराग ने युवा पीढ़ी पर चर्चा की। संतोष देसाई ने कहा कि भारत प्रगति चाहता है लेकिन परिवर्तन का विरोध करता है। रिया चोपड़ा ने मिलेनियल्स को 'परमाक्राइसिस' में जीने वाली पीढ़ी बताया और Gen-Z को पुरानी प्रणालियों के खिलाफ आंदोलन माना। अनुराग ने जोर दिया कि Gen-Z कोई एकसमान श्रेणी नहीं है—वे क्षेत्रीय स्तर पर अलग-अलग हैं (जैसे राजस्थान में सपना चौधरी फैन, मुंबई में जोहरान ममदानी), और क्रेडिट कार्ड लेकर EMI पर कॉन्सर्ट टिकट खरीदने वाली 'क्रेडिट कार्ड जनरेशन' को कुछ भी बेचा जा सकता है, लेकिन राष्ट्रीय क्रांति लाने की क्षमता नहीं।
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) 2026 का आज आखिरी दिन था, जो 19 जनवरी 2026 को समाप्त हुआ। फेस्टिवल के चारबाग स्टेज पर आयोजित सेशन 'Gen-Z, Millennials और Mummyji' ने युवा पीढ़ी, मिलेनियल्स और पुरानी पीढ़ी के बीच के अंतर, सामाजिक बदलाव, डिजिटल प्रभाव और उपभोग संस्कृति पर रोचक बहस छेड़ी। इस पैनल में प्रमुख वक्ता थे- ब्रांड एक्सपर्ट और लेखक संतोष देसाई, इंडिपेंडेंट जर्नलिस्ट और लेखिका रिया चोपड़ा (रिया चोपड़ा), और एक अन्य वक्ता अनुराग (संभवतः अनुराग वर्मा या संबंधित पैनलिस्ट)। सेशन में संतोष देसाई की मॉडरेशन में चर्चा हुई, जिसमें भारतीय समाज की प्रगति और परिवर्तन के प्रति दोहरी सोच पर खुलकर बात हुई।
