पुलिस लाइन में करोड़ों के खेल का खुलासा: जवानों के खाने से लेकर वर्दी फंड तक गड़बड़ी, हेड कॉन्स्टेबल सस्पेंड
पुलिस लाइन में मेस फंड, बर्तन फंड, सिक्योरिटी राशि और वर्दी वितरण में लाखों रुपए की वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है।
Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
June 14, 2026 • 12:15 PM | KOTA 4
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राजस्थान
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14 Jun 2026
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कोटा पुलिस लाइन में जवानों के भोजन, वर्दी, बर्तन फंड और सिक्योरिटी राशि से जुड़े खातों में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में वर्ष 2021 से फरवरी 2026 तक विभागीय फंड के संचालन में नियमों की अनदेखी और रिकॉर्ड में भारी गड़बड़ियां मिलने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले में एक हेड कॉन्स्टेबल को निलंबित कर दिया गया है, जबकि कई अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका जांच के दायरे में है।
एसपी तेजस्विनी गौतम ने मामले की जांच एडिशनल एसपी को सौंप दी है। वरिष्ठ लेखा टीम पुलिस लाइन के विभिन्न खातों, फंड और रिकॉर्ड की जांच कर रही है। शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मेस फंड में लाखों की अनियमितता
जांच में सामने आया कि हेड कॉन्स्टेबल रूपराम मीणा वर्ष 2020 से फरवरी 2026 तक मेस कैशियर के पद पर कार्यरत रहा। उसके जिम्मे मेस फंड, बर्तन फंड, पानी की मोटर सप्लाई और मनोरंजन शाखा का कार्य भी था। आरोप है कि मेस और बर्तन फंड में 12 से 13 लाख रुपए की गड़बड़ी हुई है। विभाग को कई वर्षों का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया और केवल सीमित दस्तावेज ही जांच टीम को सौंपे गए।
पुलिस लाइन की मेस में प्रतिदिन करीब 300 जवान भोजन करते हैं। जांच में सामने आया कि वास्तविक डाइट लागत 28 से 31 रुपए प्रतिदिन होने के बावजूद रिकॉर्ड में इसे 40 रुपए तक दर्शाया गया। प्रति जवान अतिरिक्त राशि वसूलकर उसका उपयोग कहां किया गया, इसकी जांच जारी है।
सिक्योरिटी फंड निजी खाते में जमा करने का आरोप
सूत्रों के अनुसार 2021 से 2026 के बीच भर्ती हुए 700 से अधिक जवानों से सिक्योरिटी राशि के रूप में 3-3 हजार रुपए जमा करवाए गए। यह राशि विभागीय खाते में जमा होनी थी, लेकिन आरोप है कि इसे निजी बैंक खाते में जमा कराया गया। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार करीब 24 से 25 लाख रुपए इस प्रक्रिया के तहत निजी खाते में जमा हुए।
60 लाख की एफडी तोड़ने पर सवाल
मेस संचालन के लिए बनाई गई लगभग 60 लाख रुपए की एफडी को भी अलग-अलग समय पर तोड़ा गया। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि एफडी की राशि का उपयोग किस उद्देश्य से किया गया और क्या विभागीय नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
वर्दी और वस्त्र भंडार में भी गड़बड़ी
पुलिस लाइन के वस्त्र भंडार में जवानों की वर्दी, जूते, मोजे और स्वेटर के वितरण को लेकर भी अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ जवानों को बाहर से वर्दी सिलवाने के लिए कहा गया, जबकि मुख्यालय से इसके लिए बजट जारी किया गया था। कई सामानों के रिकॉर्ड और स्टॉक में भी अंतर पाया गया है।
अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि पिछले कई वर्षों से पुलिस लाइन की विभिन्न शाखाओं का प्रभावी निरीक्षण नहीं हुआ। रिकॉर्ड के रखरखाव और वित्तीय नियंत्रण में गंभीर खामियां पाई गई हैं। पूर्व रिजर्व इंस्पेक्टर रामसिंह मीणा और लाइन ऑफिसर दुर्गाशंकर समेत कई अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है।
हालांकि पूर्व आरआई रामसिंह मीणा ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि मेस का लेखा-जोखा सीधे उच्च अधिकारियों के पास जाता है और उनका इससे कोई संबंध नहीं है। वहीं निलंबित हेड कॉन्स्टेबल रूपराम मीणा ने भी किसी प्रकार के गबन से इनकार किया है।
पुलिस विभाग की इस बड़ी वित्तीय अनियमितता की जांच अभी जारी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद कई और अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
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