जैसलमेर में 6 दिन का आंदोलन सफल...खत्म हुआ अनशन या झुक गया सिस्टम??
जैसलमेर में 'तिरंगा यात्रा' की अनुमति को लेकर ABVP कार्यकर्ताओं और कोतवाली पुलिस के बीच 6 दिनों से चला आ रहा विवाद आधी रात को SHO सुरजाराम का जैसलमेर से पाली (350 किमी दूर) ट्रांसफर होने के बाद समाप्त हो गया। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि इजाजत मांगने पर SHO ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया था, जिसके विरोध में वे भूख हड़ताल पर बैठ गए थे। यद्यपि पुलिस अधीक्षक ने आरोपों को खारिज किया और स्थानीय पुलिस कल्याण संगठन अफसर के समर्थन में उतरा, लेकिन बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच रातों-रात ट्रांसफर लिस्ट जारी कर दी गई, जिसे छात्रों ने अपने आंदोलन की सफलता मानते हुए अनशन खत्म कर दिया। हालांकि, इस फैसले ने यह सवाल छोड़ दिया है कि क्या यह महज एक प्रशासनिक समझौता है या सिस्टम खाकी पर बने सियासी दबाव के आगे झुक गया?
जैसलमेर: जैसलमेर में एक 'तिरंगा यात्रा' को लेकर उठा विवाद आखिरकार एक बड़े सियासी और प्रशासनिक मोड़ पर आकर थम गया है। पिछले 6 दिनों से पुलिस थाने के बाहर डटे छात्र नेताओं की जिद के आगे आखिरकार महकमे को झुकना ही पड़ा। देर रात जैसे ही थानाधिकारी का ट्रांसफर ऑर्डर जारी हुआ, थाने के बाहर जारी अनशन और धरना-प्रदर्शन तुरंत समेट लिया गया।
क्या था पूरा विवाद?
बात कारगिल विजय दिवस की है, जब एबीवीपी के कुछ कार्यकर्ता शहर में देश भक्ति यात्रा निकालने की परमिशन लेने कोतवाली पहुंचे थे। कार्यकर्ताओं का दावा था कि थाने में मौजूद SHO और उनके स्टाफ ने मदद करने के बजाय उनके साथ बदसलूकी और धक्का-मुक्की की। इसी बात से नाराज होकर युवाओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और सीधे थाने के सामने ही तंबू गाड़कर भूख हड़ताल पर बैठ गए।
आरोपों का दौर और दो फाड़ हुआ शहर
इस पूरे वाकये के बाद मामला सिर्फ छात्रों और पुलिस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरा शहर दो गुटों में बंट गया: