राजस्थान में ईद-उल-फितर: खुशियों की जगह मातम, काले झंडे और मुर्दाबाद के नारे

इस ईद-उल-फितर पर राजस्थान (खासकर जयपुर, अजमेर, सीकर आदि) में शिया समुदाय ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका-इजराइल हमलों में हुई शहादत के शोक में खुशियां नहीं मनाईं। मस्जिदों पर काले झंडे लगाए गए, नमाजियों ने काली पट्टी बांधी, पुराने/काले कपड़े पहने, नए कपड़े-मिठाई-सेवइयां त्याग दीं। जयपुर के आमेर और सुभाष चौक पर रैलियां निकाली गईं, अमेरिका-इजराइल मुर्दाबाद के नारे लगाए गए, पुतले जलाए गए। यह मातम का रूप था, लेकिन हिंदुओं ने फूल बरसाकर सद्भाव दिखाया।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
March 21, 2026 • 12:50 PM  17
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राजस्थान में ईद-उल-फितर: खुशियों की जगह मातम, काले झंडे और मुर्दाबाद के नारे
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21 Mar 2026
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राजस्थान में ईद-उल-फितर: खुशियों की जगह मातम, काले झंडे और मुर्दाबाद के नारे

21 मार्च 2026 को राजस्थान में ईद-उल-फितर का त्योहार सामान्य रूप से नहीं मनाया गया। इस बार यह त्योहार शोक, विरोध और मातम में बदल गया, खासकर शिया समुदाय के लिए। कारण था ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमलों में हुई हत्या (शहादत)। इस घटना ने पूरे शिया मुस्लिम समुदाय को गहरा सदमा पहुंचाया, जिसके चलते राजस्थान के कई जिलों में ईद को सादगी और विरोध के साथ मनाया गया।

विरोध और नारेबाजी का माहौल

जयपुर के आमेर इलाके में शिया और सुन्नी मुस्लिम समाज की महिलाएं और बच्चे सड़कों पर उतरे। उन्होंने रैली निकाली और अमेरिका-इजराइल मुर्दाबाद के जोरदार नारे लगाए। जयपुर के सुभाष चौक पर शिया समुदाय के लोगों ने इजराइल और अमेरिका के खिलाफ "मुर्दाबाद" लिखी तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया। कई जगहों पर नेतन्याहू और ट्रंप के पुतले भी जलाए गए।

जयपुर, सीकर, अजमेर, जोधपुर, उदयपुर, भरतपुर, बांसवाड़ा और जालोर सहित राजस्थान के कई जिलों में मस्जिदों पर काले झंडे लहराए गए। नमाज पढ़ने वाले नमाजियों ने बाजू पर काली पट्टी बांधी और पुराने या काले कपड़ों में नमाज अदा की। ईद की पारंपरिक खुशियां जैसे नए कपड़े पहनना, मिठाइयां बांटना, सेवइयां बनाना या विशेष पकवान तैयार करना पूरी तरह त्याग दिया गया।

अजमेर के दौराई के इमाम-ए-जुमा मौलाना सैय्यद तकी जाफर ने कहा,

"ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की शहादत के कारण समाज शोक मना रहा है। इस साल किसी भी प्रकार की खुशी नहीं मनाई जाएगी। नए कपड़े पहनना, मिठाई या विशेष पकवान बनाना जैसी परंपराएं नहीं निभाई जाएंगी। यह हमारे लिए मातम का वक्त है।"

नमाजियों ने इसे मोहर्रम जैसा मातम बताया और कहा, "हम मातम मना रहे हैं। जब तक इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का खात्मा नहीं होता, तब तक हम कोई त्योहार नहीं मनाएंगे।"

साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल

विरोध के बीच राजस्थान में हिंदू-मुस्लिम एकता की खूबसूरत तस्वीर भी सामने आई। जयपुर की ईदगाह पर हिंदुओं ने नमाजियों पर फूल बरसाए, गले लगाया और ईद मुबारक की शुभकामनाएं दीं। हिंदू मुस्लिम सामाजिक एकता समिति के सदस्य जसवंत सिंह ने कहा कि देश में भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब को बरकरार रखने के लिए हर ईद पर पुष्पवर्षा की जाती है।

अजमेर की दरगाह में जन्नती दरवाजा आधे दिन के लिए खोला गया, जहां श्रद्धालुओं ने जियारत की। कई जगहों पर गरीबों और अनाथ बच्चों को उपहार बांटे गए। नमाज के दौरान शांति, सद्भाव और विश्व में खुशहाली की दुआएं मांगी गईं।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

ईदगाह, जामा मस्जिद और शिया जामा मस्जिद के आसपास पुलिस, RAF जवानों, ड्रोन और फ्लैग मार्च के साथ भारी सुरक्षा व्यवस्था रही। प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सतर्कता बरती।

Mohit Parihar

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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