राजस्थान सेवानिवृत्त पुलिस कल्याण संस्थान के नेतृत्व में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पूर्व पुलिस अधिकारियों और जवानों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारी सुबह करीब 10 बजे जयपुर कलेक्ट्रेट के सामने एकत्र हुए और सहकारिता मंत्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों ने करीब डेढ़ घंटे तक धरना देकर अपना विरोध जताया। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर कार्यालय पहुंचा, जहां राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में मांग की गई कि यदि किसी मंत्री द्वारा पुलिसकर्मियों के साथ अशोभनीय भाषा और व्यवहार किया गया है, तो यह न केवल पुलिस बल का अपमान है बल्कि संविधान और प्रशासनिक व्यवस्था की गरिमा के भी खिलाफ है। ऐसे में मंत्री के खिलाफ उचित कार्रवाई करते हुए उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए।
पुलिस के सम्मान और मनोबल का मुद्दा
राजस्थान सेवानिवृत्त पुलिस कल्याण संस्थान के प्रदेशाध्यक्ष रिछपाल सिंह पूनिया ने कहा कि पुलिस बल अनुशासन और सेवा भावना के साथ चौबीसों घंटे कार्य करता है। आपदा, दुर्घटना, अपराध या किसी भी संकट की स्थिति में सबसे पहले पुलिस ही लोगों तक पहुंचती है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई जनप्रतिनिधि या मंत्री सार्वजनिक रूप से पुलिसकर्मियों के साथ अपमानजनक व्यवहार करता है तो इससे पूरे पुलिस विभाग का मनोबल प्रभावित होता है। ऐसे मामलों में सरकार को गंभीरता दिखानी चाहिए।
सेवारत पुलिसकर्मी खुलकर नहीं उठा सकते मुद्दा
रिछपाल सिंह पूनिया ने कहा कि वर्तमान में कार्यरत पुलिसकर्मियों का कोई संगठन नहीं है, इसलिए वे खुलकर अपनी बात या मांग नहीं रख सकते। ऐसे में सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी उनके सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आए हैं।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि पुलिस बल के सम्मान और गरिमा की रक्षा के लिए किया जा रहा है।
सरकार को दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। फिलहाल जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है, लेकिन मांगें नहीं मानी गईं तो प्रदेशभर के सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों को एकजुट कर बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पुलिस के सम्मान से जुड़ा यह मुद्दा केवल एक जिले या एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पुलिस महकमे के आत्मसम्मान से जुड़ा विषय है।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक कथित ऑडियो वायरल होने के बाद सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक विवादों में आ गए थे। ऑडियो में पुलिसकर्मियों से कथित तौर पर अभद्र भाषा में बातचीत करने का दावा किया गया था। हालांकि मंत्री पहले ही इस ऑडियो को फर्जी बताते हुए अपनी आवाज होने से इनकार कर चुके हैं।
फिलहाल मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चाएं जारी हैं, जबकि सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों का संगठन इस मुद्दे पर लगातार सरकार से कार्रवाई की मांग कर रहा है।