इस गाने को किसी स्टूडियो में कृत्रिम बारिश के बीच नहीं फिल्माया गया था, बल्कि मुंबई की असली बारिश और शहर की वास्तविक लोकेशनों पर शूट किया गया था।
गीत में अमिताभ बच्चन और मौसमी चटर्जी को बारिश में भीगते हुए मुंबई की सड़कों, फुटपाथों और ऐतिहासिक इमारतों के आसपास घूमते हुए दिखाया गया। यही कारण है कि इस गीत को देखते हुए दर्शकों को बनावटीपन नहीं बल्कि एक सच्ची और जीवंत प्रेम कहानी का एहसास होता है।
जब आर.डी. बर्मन ने सादगी को बनाया गीत की ताकत
फिल्म मंजिल के लिए संगीत तैयार करते समय आर.डी. बर्मन का उद्देश्य कोई भव्य ऑर्केस्ट्रा या भारी-भरकम संगीत रचना तैयार करना नहीं था। वह एक ऐसी धुन चाहते थे जो बारिश की बूंदों की तरह सहज और स्वाभाविक महसूस हो।
आर.डी. बर्मन की सबसे बड़ी खासियत यही थी कि वह हर गीत को उसकी कहानी और भावनाओं के अनुसार अलग रूप देते थे। 'रिमझिम गिरे सावन' में भी उन्होंने सादगी को सबसे बड़ी ताकत बनाया।
धुन में ऐसी मिठास और नरमी रखी गई कि सुनने वालों को महसूस हो जैसे बारिश खुद कोई गीत गुनगुना रही हो। यही वजह है कि चार दशक से ज्यादा समय गुजर जाने के बाद भी यह धुन उतनी ही ताजा लगती है जितनी रिलीज के समय लगी थी।
योगेश ने शब्दों में उकेर दी प्रेम और बारिश की तस्वीर
इस अमर गीत के बोल मशहूर गीतकार योगेश ने लिखे थे।
योगेश की पहचान हमेशा सरल और दिल को छू लेने वाली भाषा रही। वे कठिन शब्दों और भारी-भरकम उपमाओं की बजाय आम बोलचाल की भाषा में भावनाओं को पिरोने के लिए जाने जाते थे।
गीत की पंक्ति—"सुलग-सुलग जाए मन..."
प्रेम और बारिश के मिलन को बेहद खूबसूरती से बयां करती है। गीत की सबसे बड़ी ताकत इसकी सादगी ही रही। दर्शकों को कभी नहीं लगा कि वे किसी कवि की कल्पना सुन रहे हैं, बल्कि ऐसा महसूस हुआ जैसे उनके अपने दिल की बातें शब्दों का रूप ले चुकी हों।
अमिताभ बच्चन और मौसमी चटर्जी की केमिस्ट्री ने बढ़ाई खूबसूरती
'रिमझिम गिरे सावन' को अमर बनाने में अमिताभ बच्चन और मौसमी चटर्जी की सहज और स्वाभाविक केमिस्ट्री का भी बड़ा योगदान रहा। बारिश में भीगते हुए दोनों कलाकारों की मुस्कान, उनकी आंखों की भाषा और बिना ज्यादा संवादों के व्यक्त किया गया प्रेम दर्शकों के दिलों में उतर गया।यही वजह है कि यह गीत केवल सुनने में ही नहीं, देखने में भी उतना ही खूबसूरत लगता है।
एक गीत, दो आवाजें... और दोनों सुपरहिट
बहुत कम लोग जानते हैं कि 'रिमझिम गिरे सावन' के दो अलग-अलग संस्करण रिकॉर्ड किए गए थे। एक संस्करण को महान गायक किशोर कुमार ने अपनी आवाज दी थी, जबकि दूसरा संस्करण स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने गाया था। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही संस्करण दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुए।
किशोर कुमार की आवाज वाला संस्करण जहां रोमांटिक और मस्तीभरा एहसास देता है, वहीं लता मंगेशकर का संस्करण गीत में एक अलग भावनात्मक गहराई जोड़ता है।
मानसून की पहचान बन चुका है यह गीत
समय के साथ 'रिमझिम गिरे सावन' सिर्फ फिल्म मंजिल का हिस्सा नहीं रहा। यह भारतीय मानसून का पर्याय बन गया। आज भी रेडियो, टीवी, सोशल मीडिया और म्यूजिक प्लेटफॉर्म्स पर बारिश शुरू होते ही सबसे पहले जिन गीतों की याद आती है, उनमें 'रिमझिम गिरे सावन' का नाम सबसे ऊपर रहता है।
नई पीढ़ी भी इस गीत को उतना ही पसंद करती है जितना उस दौर के दर्शक करते थे।
क्यों आज भी अमर है 'रिमझिम गिरे सावन'?
क्योंकि इस गीत में न सिर्फ संगीत है, न सिर्फ प्रेम है और न सिर्फ बारिश है... बल्कि इसमें वे भावनाएं हैं जिन्हें हर पीढ़ी महसूस करती है। आर.डी. बर्मन का मधुर संगीत, योगेश के सरल लेकिन गहरे शब्द, किशोर कुमार और लता मंगेशकर की जादुई आवाजें तथा अमिताभ बच्चन और मौसमी चटर्जी की शानदार मौजूदगी ने मिलकर इस गीत को ऐसा कालजयी दर्जा दिया है जो शायद कभी फीका नहीं पड़ेगा।
इसलिए जब भी सावन की पहली फुहार गिरती है, कहीं न कहीं कोई दिल आज भी यही गुनगुनाने लगता है:
"रिमझिम गिरे सावन, सुलग-सुलग जाए मन..."