सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक 4 दिसंबर तक बढ़ाई
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान मोदी सरनेम और सेना पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर लगी अंतरिम रोक को 4 दिसंबर 2025 तक बढ़ा दिया। कोर्ट ने अगली सुनवाई 4 दिसंबर को तय की है।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रही ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई पर लगी अंतरिम रोक को 4 दिसंबर 2025 तक बढ़ा दिया। यह फैसला 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सेना को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में आया है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 4 दिसंबर को निर्धारित की है, जब पक्षकारों को विस्तृत बहस का अवसर मिलेगा।
मामले का पृष्ठभूमि; यह विवाद 2022 के अंत में तब शुरू हुआ जब राहुल गांधी ने वायनाड (केरल) में एक रैली के दौरान 'मोदी सरनेम' पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, "मोदी सरनेम वाले ज्यादातर चोर होते हैं। क्यों ना सभी मोदी सरनेम वालों को चोर कहें?" इस बयान को भारतीय सेना के अधिकारियों और पूर्व सैनिकों ने आपत्तिजनक माना, क्योंकि इससे सेना की छवि धूमिल होने का आरोप लगा। कांग्रेस नेता के इस बयान के बाद भाजपा नेता पुनार्व सूर्यवंशी ने सूरत (गुजरात) की एक निचली अदालत में मानहानि का मुकदमा दायर किया। ट्रायल कोर्ट ने अप्रैल 2023 में राहुल गांधी को समन जारी किया, लेकिन वे पेश नहीं हुए। इसके बाद जून 2023 में कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। राहुल ने इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2023 में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर पहली बार अंतरिम रोक लगाई थी। तब से यह रोक बार-बार बढ़ाई जा रही है, ताकि उच्च न्यायालय में अपील पर विचार हो सके। वर्तमान में, यह मामला सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की बेंच के समक्ष लंबित है।
गुरुवार की सुनवाई का विवरण; गुरुवार को हुई सुनवाई में राहुल गांधी के वकील अभिषेक सिंहवी ने अदालत से अनुरोध किया कि ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई को स्थायी रूप से रोका जाए, क्योंकि यह राजनीतिक रूप से प्रेरित है। उन्होंने तर्क दिया कि बयान सेना के खिलाफ नहीं था, बल्कि यह सामान्य टिप्पणी थी जो सरनेम पर आधारित थी। सिंहवी ने कहा, "यह बयान सेना की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला नहीं था, और इसे संदर्भ से हटाकर पेश किया जा रहा है।"दूसरी ओर, याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया कि बयान ने पूर्व सैनिकों की भावनाओं को आहत किया है और यह मानहानि के दायरे में आता है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद रोक को 4 दिसंबर तक बढ़ाने का फैसला किया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई में पक्षकार दलीलें पूरी करें।