जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि सायरन बजते ही घबराने की जरूरत नहीं है। जैसे ही सायरन सुनाई दे—
- घर, दुकान और वाहनों की सभी लाइट तुरंत बंद कर दें
- घर के अंदर ही सुरक्षित रहें
- बिना जरूरत के बाहर न निकलें
- सोशल मीडिया या अफवाहों से दूर रहें
यह अभ्यास पूरी तरह से नियंत्रित और सुरक्षित है, इसलिए लोगों से सहयोग की अपेक्षा की गई है।
ब्लैकआउट के दौरान रखें ये सावधानियां
ब्लैकआउट के दौरान छोटी-छोटी लापरवाहियां भी जोखिम बढ़ा सकती हैं, इसलिए प्रशासन ने कुछ जरूरी सावधानियां बताई हैं।
माचिस, मोबाइल फ्लैश या टॉर्च का इस्तेमाल न करें और यह सुनिश्चित करें कि खिड़कियों या दरवाजों से बाहर कोई रोशनी न जाए। अगर कोई व्यक्ति वाहन चला रहा हो तो वह तुरंत सड़क किनारे रुककर लाइट बंद कर दे।
इसके अलावा धूम्रपान से बचने, अनावश्यक आवाजाही न करने और किसी भी तरह की भगदड़ से दूर रहने की सलाह दी गई है, ताकि स्थिति पूरी तरह नियंत्रित बनी रहे।
आपात स्थिति में कैसे करें बचाव?
अगर वास्तविक आपात स्थिति जैसी परिस्थिति बनती है, तो लोगों को शांत रहकर सुरक्षित स्थान पर शरण लेने की सलाह दी गई है।
- प्रशासन के निर्देशों का पालन करें
- मोबाइल या रेडियो के जरिए सरकारी अलर्ट सुनते रहें
- घर में कम से कम तीन दिन का पीने का पानी और सूखा भोजन रखें
- प्राथमिक उपचार किट, जरूरी दवाइयां और महत्वपूर्ण दस्तावेज पहले से तैयार रखें
यह तैयारी किसी भी अनहोनी के समय आपके और आपके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है।
सायरन के संकेत क्या होंगे?
प्रशासन ने सायरन के अलग-अलग संकेतों के बारे में भी जानकारी दी है, ताकि लोग उन्हें पहचान सकें।
- ड्रोन या हवाई हमले का संकेत: 2 मिनट तक ऊंची-नीची आवाज वाला सायरन
- खतरा टलने का संकेत: 2 मिनट तक एक समान आवाज वाला सायरन
इन संकेतों को समझना बेहद जरूरी है, ताकि सही समय पर सही प्रतिक्रिया दी जा सके।
प्रशासन की अपील और हेल्पलाइन
जिला प्रशासन ने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि किसी भी संदिग्ध वस्तु को हाथ न लगाएं और तुरंत पुलिस या संबंधित अधिकारियों को सूचना दें।
जरूरत पड़ने पर नागरिक सुरक्षा कंट्रोल रूम से इन नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है:
क्यों जरूरी है यह अभ्यास?
ऐसी मॉक ड्रिल का मकसद सिर्फ एक अभ्यास नहीं, बल्कि लोगों में जागरूकता और आत्मविश्वास बढ़ाना है। जब आम नागरिक पहले से तैयार रहते हैं, तो किसी भी आपदा के समय नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
यह अभ्यास प्रशासन और जनता के बीच समन्वय को मजबूत करता है और यह सुनिश्चित करता है कि भविष्य में किसी भी खतरे का सामना मिलकर और समझदारी से किया जा सके।