IPS अंशिका वर्मा को सलामी नहीं देने पर सिपाही पर कार्रवाई! क्या है पुलिस सैल्यूट का नियम?
बरेली में एक नए सिपाही द्वारा एसपी को सलामी न देने का मामला चर्चा में है। इसके बाद उसे अतिरिक्त ट्रेनिंग के लिए भेज दिया गया। मामला सोशल मीडिया पर बहस का विषय बना हुआ है कि पुलिस में सलामी कितनी जरूरी होती है।
उत्तर प्रदेश के बरेली में पुलिस सैल्यूट को लेकर एक मामला सुर्खियों में है। साउथ एसपी अंशिका वर्मा के निरीक्षण के दौरान एक नए सिपाही द्वारा सलामी न देने पर उसे 15 दिन की अतिरिक्त ड्रिल और ट्रेनिंग के लिए पुलिस लाइन भेज दिया गया। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर इसे सजा बताया जा रहा है, जबकि पुलिस विभाग इसे अनुशासन और प्रशिक्षण का हिस्सा बता रहा है।
क्या है पूरा मामला?
9 मई को एसपी साउथ अंशिका वर्मा आंवला थाने के निरीक्षण पर पहुंचीं। बताया गया कि उस समय वह सादी वर्दी में थीं लेकिन सरकारी गाड़ी और स्टाफ मौजूद था।थाने के गेट पर तैनात नए सिपाही परम सिंह ने उन्हें सलामी नहीं दी। बाद में इसे अनुशासनहीनता मानते हुए सिपाही को अतिरिक्त ट्रेनिंग के लिए पुलिस लाइन भेज दिया गया। हालांकि सिपाही का कहना है कि उन्होंने सादी ड्रेस में अधिकारी को पहचान नहीं पाया, इसलिए सलामी नहीं दी गई।
पुलिस में सलामी क्यों दी जाती है?
पुलिस और सेना में सलामी सिर्फ औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह सम्मान, अनुशासन और पहचान का प्रतीक मानी जाती है। सलामी यह भी दर्शाती है कि जवान ड्यूटी पर सतर्क है और सामने वाला अधिकारी सम्मान योग्य है।