हमारे पास पढ़ने की जगह ही नहीं: बाड़मेर के सरकारी स्कूल के बच्चों ने कलेक्ट्रेट को बनाया क्लासरूम, 2 घंटे तक की पढ़ाई-प्रार्थना

बाड़मेर के वार्ड-1 की कच्ची बस्ती के महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम सरकारी स्कूल के 50 बच्चे अपनी जर्जर बिल्डिंग और सामुदायिक भवन में बाधित पढ़ाई से तंग आकर कलेक्ट्रेट पहुंच गए। वहां परिसर में 2 घंटे तक प्रार्थना, व्यायाम और पढ़ाई की। बच्चों ने कलेक्टर टीना डाबी से स्थायी स्कूल भवन की मांग की। दो साल से फाइल लंबित होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
December 12, 2025 • 11:16 AM  104
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हमारे पास पढ़ने की जगह ही नहीं: बाड़मेर के सरकारी स्कूल के बच्चों ने कलेक्ट्रेट को बनाया क्लासरूम, 2 घंटे तक की पढ़ाई-प्रार्थना
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12 Dec 2025
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हमारे पास पढ़ने की जगह ही नहीं: बाड़मेर के सरकारी स्कूल के बच्चों ने कलेक्ट्रेट को बनाया क्लासरूम, 2 घंटे तक की पढ़ाई-प्रार्थना

बाड़मेर (राजस्थान), 12 दिसंबर 2025। “हमारे पास पढ़ने की जगह ही नहीं है” – ये शब्द हैं राजस्थान के बाड़मेर जिले में महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम घुमक्कड़ सरकारी स्कूल के उन मासूम बच्चों के, जो अपनी पढ़ाई के लिए गुरुवार को सीधे जिला कलेक्ट्रेट पहुंच गए और वहां परिसर में ही स्कूल शुरू कर दिया।क्या हुआ कलेक्ट्रेट में?दोपहर करीब 12 बजे लगभग 50 बच्चे, अपनी किताबें-कॉपियां लिए, कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंचे। वहां उन्होंने सबसे पहले प्रार्थना की, फिर व्यायाम किया। इसके बाद कक्षा 8वीं की छात्रा अनु ने छोटे बच्चों को एबीसीडी, अंकों की गिनती (1 से 100 तक) और कुछ बेसिक पढ़ाई कराई। करीब 2 घंटे तक (12 बजे से 2 बजे तक) कलेक्ट्रेट का लॉन सरकारी स्कूल बन गया। वहां मौजूद अधिकारी-कर्मचारी और आम लोग ये नजारा देखकर हैरान रह गए।

आखिर बच्चे कलेक्ट्रेट क्यों पहुंचे? दरअसल ये बच्चे बाड़मेर शहर के वार्ड नंबर 1 की कच्ची बस्ती के रहने वाले हैं। इनका स्कूल “महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम घुमक्कड़ सरकारी स्कूल” पहले एक किराए की जर्जर इमारत में चल रहा था। मार्च 2025 में इमारत को असुरक्षित घोषित कर खाली करा लिया गया और स्कूल को पास के सामुदायिक भवन (सामुदायिक सभा भवन) में शिफ्ट कर दिया गया।लेकिन सामुदायिक भवन में लगातार शादी-विवाह, सामाजिक कार्यक्रम और अन्य आयोजन होते रहते हैं। क्लासरूम को स्टोर रूम की तरह इस्तेमाल किया जाता है। गुरुवार को भी एक शादी का कार्यक्रम था, पूरा क्लासरूम बर्तनों से भरा पड़ा था। शिक्षकों ने बच्चों को घर भेज दिया।परेशान और गुस्साए बच्चे बोले – “आज फिर बर्तन पड़े हैं, पढ़ाई नहीं हो सकती।” फिर सबने फैसला किया कि अब सीधे कलेक्टर मैडम (टीना डाबी) से मिलेंगे और अपनी बिल्डिंग की मांग करेंगे।

दो साल से फाइल अटकी, मंत्री के आदेश के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं बीजेपी अनुसूचित जनजाति मोर्चा के जिला अध्यक्ष राजूदास वैष्णव ने बताया:पिछले दो साल से स्कूल के लिए नई जमीन आवंटन और भवन निर्माण की फाइल जिला प्रशासन में घूम रही है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने इसका आदेश भी दिया था, लेकिन आज तक अमल नहीं हुआ। 15 नवंबर 2025 को बिरसा मुंडा जयंती पर प्रभारी मंत्री जोराराम कुमावत को भी इसकी जानकारी दी गई थी, फिर भी कोई सुनवाई नहीं हुई। नतीजा यह कि गरीब और दलित-आदिवासी बस्ती के बच्चे बिना स्थायी स्कूल भवन के भटक रहे हैं। बच्ची अनु ने कहा – मैं फौजी बनना चाहती हूं, इसके लिए पढ़ाई जरूरी हैजिन बच्चों ने कलेक्ट्रेट में पढ़ाई कराई, उनमें सबसे आगे थी कक्षा 8वीं की छात्रा अनु। उसने बताया:“जहां भी जाते हैं, वहां से भगा दिया जाता है। आज हम टीना डाबी मैडम से मिलने आए हैं। हम उनसे कहेंगे कि हमें अपनी बिल्डिंग चाहिए, बैठने की जगह चाहिए। मैं बड़ी होकर फौजी बनना चाहती हूं। फौजी बनने के लिए अच्छे से पढ़ाई करनी जरूरी है।

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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