भजनलाल सरकार का 'भ्रष्टाचार पर ताबड़तोड़ प्रहार' 13 अधिकारियों पर सख्ती...

राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने भ्रष्टाचार, लापरवाही और अनुशासनहीनता के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत 8 मामलों का निस्तारण करते हुए 13 अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की। जल जीवन मिशन में निविदा घोटाले की जांच को मंजूरी, दो अधिकारियों की वेतन वृद्धि रोकी, एक रिटायर्ड अधिकारी की पेंशन रोकी, दो अपीलें खारिज और एक मामला राज्यपाल को भेजा गया। सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने का संकल्प।

Basanti Parmar
Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor
November 2, 2025 • 4:50 PM  21
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भजनलाल सरकार का 'भ्रष्टाचार पर ताबड़तोड़ प्रहार' 13 अधिकारियों पर सख्ती...
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2 Nov 2025
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भजनलाल सरकार का 'भ्रष्टाचार पर ताबड़तोड़ प्रहार' 13 अधिकारियों पर सख्ती...

जयपुर, 2 नवंबर 2025: राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति को और मजबूत करते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में राज्य सेवा के अधिकारियों के खिलाफ लंबित आठ महत्वपूर्ण मामलों का तेजी से निस्तारण किया गया। इस कार्रवाई से कुल 13 अधिकारियों पर अनुशासनात्मक दंड लगाया गया है, जो शासन व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को मजबूत करने की दिशा में सरकार की अटल प्रतिबद्धता को दर्शाता है।यह कदम न केवल भ्रष्टाचार, लापरवाही और अनुशासनहीनता के प्रति सरकार की शून्य सहनशीलता को उजागर करता है, बल्कि राजस्थान के नागरिकों में भी विश्वास जगाने का काम कर रहा है। मुख्यमंत्री शर्मा ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कोई भी दोषी अधिकारी कानून की पकड़ से बच नहीं सकता। "ईमानदारी और जिम्मेदारी ही हमारी शासन की आधारशिला है। भ्रष्टाचार का कोई स्थान नहीं बर्दाश्त किया जाएगा," उन्होंने बैठक में अधिकारियों को चेतावनी भरे लहजे में कहा।

प्रमुख कार्रवाइयों का ब्यौरा: सख्ती का पूरा खाका

सरकार ने इन आठ मामलों में विविध प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाइयां की हैं, जो राजस्थान सिविल सेवा (सेवा की शर्तें व दंड विधि) नियमावली, 1971 (सीसीए नियम) के तहत ली गई हैं। यहां विस्तार से समझें:

जल जीवन मिशन में निविदा घोटाले पर भारी कार्रवाई: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधन), 2018 की धारा 17(ए) के तहत एक गंभीर मामले में तीन अभियुक्त अभियंताओं के खिलाफ विस्तृत जांच और गहन अनुसंधान की मंजूरी दी गई है। यह मामला जल जीवन मिशन की निविदाओं में कथित गड़बड़ी से जुड़ा है, जहां अधिकारियों पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। जांच पूरी होने पर दोष सिद्ध होने पर आपराधिक अभियोजन की प्रक्रिया तेजी से चलाई जाएगी। यह कदम ग्रामीण जल आपूर्ति जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। 

सेवारत अधिकारियों पर वेतन वृद्धि रोक का डंडा: दो सक्रिय अधिकारियों के मामलों में वार्षिक वेतन वृद्धि को संचयी और असंचयी प्रभाव से रोकने का सख्त दंड लगाया गया है। यह कार्रवाई सीसीए नियम-16 के तहत विभागीय जांच के निष्कर्ष पर आधारित है, जहां प्रमाणित आरोपों में लापरवाही और कर्तव्य में कोताही पाई गई। इससे अधिकारियों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ उनके प्रदर्शन पर सीधा असर पड़ेगा।

राज्यपाल के पास रेफरल: एक मामले में बड़ी सिफारिश: नियम 16 सीसीए के तहत प्रमाणित आरोपों की जांच निष्कर्ष को अनुमोदित करते हुए एक मामले को राज्यपाल महोदय की स्वीकृति के लिए अग्रेषित किया गया है। यह मामला संवेदनशील होने के कारण उच्च स्तरीय मंजूरी की आवश्यकता वाला है, और इसमें अधिकारी पर गंभीर कदाचार के आरोप हैं। राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद आगे की कार्रवाई निर्धारित होगी।

सेवानिवृत्त अधिकारी की पेंशन पर ब्रेक: एक रिटायर्ड अधिकारी के खिलाफ पेंशन रोके जाने का दंड अनुमोदित कर दिया गया है। यह कार्रवाई पुराने कदाचार से जुड़ी जांच के आधार पर की गई, जो सेवानिवृत्ति के बाद भी जारी रही। सरकार का मानना है कि सेवानिवृत्ति भ्रष्टाचार को माफ करने का लाइसेंस नहीं है।

अपील याचिकाओं को रद्दी का रास्ता: दो मामलों में सीसीए नियम-34 के तहत दायर अपील याचिकाओं को खारिज कर पूर्व में लगाए गए दंड को यथावत रखा गया है। अपीलकर्ता अधिकारियों ने अपनी सफाई पेश की थी, लेकिन जांच समिति ने आरोपों को सही ठहराते हुए कोई राहत नहीं दी।

ये कार्रवाइयां कुल आठ प्रकरणों—जिनमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े पांच मामले शामिल हैं—के निस्तारण से निकली हैं। इससे पहले भी भजनलाल सरकार ने अप्रैल 2025 में 18 प्रकरणों में 21 अधिकारियों पर कार्रवाई की स्वीकृति दी थी, और अगस्त 2025 में 37 लंबित मामलों का समापन करते हुए 9 पुलिस इंस्पेक्टर्स को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी थी। यह सिलसिला दर्शाता है कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सतत अभियान चला रही है।

सरकार का संकल्प: सुशासन की नई इबारत

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बैठक के बाद जारी बयान में कहा, "हमारा उद्देश्य एक ऐसे राजस्थान का निर्माण करना है जहां हर सरकारी कामकाज में पारदर्शिता हो, जवाबदेही सुनिश्चित हो और सुशासन की मिसाल कायम हो। दोषियों के खिलाफ सख्ती जारी रहेगी, ताकि सच्चे और समर्पित अधिकारी प्रोत्साहित हों।" कार्मिक विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ये निर्णय उच्च स्तरीय समितियों की सिफारिशों और विस्तृत जांच पर आधारित हैं। राज्य स्तर पर अब तक सैकड़ों ऐसे मामलों का निस्तारण हो चुका है, जिससे प्रशासनिक दक्षता में सुधार आया है।यह कार्रवाई न केवल प्रभावित अधिकारियों के लिए चेतावनी है, बल्कि पूरे नौकरशाही तंत्र के लिए एक संदेश भी है। राजस्थान सरकार की यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां अन्य राज्य भी ऐसी मॉडल नीतियों से प्रेरणा ले सकते हैं। आने वाले दिनों में और अधिक मामलों के निस्तारण की उम्मीद है, जो भजनलाल सरकार के सुशासन अभियान को नई गति देगा। 

Basanti Parmar

Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026Sub Editor

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